उद्धव को दो टूक…येदियुरप्पा ने कहा- एक इंच भी जमीन नहीं देंगे 

बेंगलुरु. ऑनलाइन टीम : महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच रहे सीमा विवाद तल्खी तक पहुंच चुका है। उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा था कि उनकी सरकार कर्नाटक के उन इलाकों को राज्य में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां मराठी भाषी लोगों की बहुलता है। पलटवार करते हुए कर्नाटक के सीएम येदियुरप्पा ने दो टूक कहा कि कर्नाटक की एक भी इंच जमीन नहीं दी जाएगी।
दरअसल, 1947 से पहले महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्य अलग नहीं थे। तब बॉम्बे प्रेसीडेंसी और मैसूर स्टेट हुआ करते थे।

आज के बीजापुर, बेलगावी (पुराना नाम बेलगाम), धारवाड़ और उत्तर कन्नड जिले बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा थे। बॉम्बे प्रेसीडेंसी में मराठी, गुजराती और कन्नड भाषाएं बोलने वाले लोग रहा करते थे। भारत की आजादी के बाद राज्यों का बंटवारा शुरू हुआ। बेलगाम में मराठी बोलने वालों की संख्या कन्नड बोलने वालों की संख्या से ज्यादा थी। बेलगाम नगरीय निकाय ने 1948 में मांग की कि इसे मराठी बहुल होने के चलते प्रस्तावित महाराष्ट्र राज्य का हिस्सा बनाया जाए।

1956 में राज्य पुनर्गठन कानून लागू हुआ तो बेलगाम को महाराष्ट्र की जगह मैसूर स्टेट का हिस्सा बना दिया गया। मैसूर स्टेट का नाम बदलकर 1973 में कर्नाटक हो गया। 1948 में बेलगाम को महाराष्ट्र में मिलाने की मांग के साथ ही महाराष्ट्र एकीकरण समिति नाम से एक समूह बन गया। इस समिति की मांग थी कि कर्नाटक में आने वाले 800 मराठी भाषी गांवों को कर्नाटक से निकालकर महाराष्ट्र का हिस्सा बनाया जाए। इनमें से अधिकतर गांव बेलगाम जिले का हिस्सा थे।

बेलगाम समेत अन्य सीमावर्ती इलाकों को लेकर दोनों राज्यों के बीच जारी विवाद कई वर्षों से उच्चतम न्यायालय में लंबित है। इस बीच, बेलगाम तथा कुछ अन्य सीमावर्ती इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करवाने के लिए संघर्ष कर रहे क्षेत्रीय संगठन महाराष्ट्र एकीकरण समिति ने उन लोगों की याद में 17 जनवरी को ‘शहीदी दिवस’ मनाया, जो इस उद्देश्य के लिए लड़ते हुए 1956 में मारे गए थे। इसी मौके पर उद्धव ठाकरे ने बयान दिया।

सीमा विवाद का यह मामला एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी सरकार कर्नाटक के उन इलाकों को राज्य में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां मराठी भाषी लोगों की बहुलता है। येदियुरप्पा ने उद्धव ठाकरे के इस बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है, मैं उद्धव ठाकरे के बयान की निंदा करता हूं। हम इस तरफ से एक इंच भी जमीन नहीं देने जा रहे हैं।’

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