हिरेन की हत्या में और दो अधिकारी शामिल? एनआईए के रडार पर…

मुंबई : मनसुख हिरेन की हत्या में सचिन वाझे के साथ अन्य दो पुलिस निरीक्षक के शामिल होने का संदेह एनआईए को है। वाझे के षड्यंत्र में शामिल होकर सबूत नष्ट करने में मदद करने का संदेह जताया जा रहा है। ये अधिकारी क्राइम ब्रांच के हैं, इसमे से एक अधिकारी द्वारा मनसुख के साथ सफर कर रहे वाझे की गाड़ी को गायमुख से ठाणे तक एस्कॉर्ट करने की जानकारी अधिकारी को मिली है। इन दो अधिकारियों में से एक ठाणे का है, जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी सूत्रों से मिली है।

वाझे और मनसुख जिस गाडी में बैठे। उसी गाड़ी में मनसुख की हत्या की गई। उस गाडी को रास्ते में नाकेबंदी पर कोई रोके नहीं इसलिए पुलिस निरीक्षक उसके आगे गाड़ी से यात्रा कर रहे थे। 4 मार्च को मनसुख की हत्या हुई, उसी रात क्राइम ब्रांच के एक  पुलिस निरीक्षक को वाझे ने सीआईयू के ऑफिस में रुकने के लिए कहा और अपना मोबाइल उसके पास दिया था। वाझे ने उससे कहा था कि कोई फोन आए तो कहना कि वाझे बिजी हैं।

काजी, ओव्हाल के साथ चारो से पूछताछ

सचिन वाझे के तत्कालीन सहयोग से एनआईए पूछताछ कर रही है। सहायक निरीक्षक रियाज काझी और प्रशांत ओव्हाल के साथ चारो से एनआईए ने लगभग 5 घंटे तक पूछताछ की।  वाझे द्वारा नष्ट की गई वस्तू व अन्य सामानों की जानकारी उनसे ली जा रही है।  25 फरवरी को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरी गाड़ी मिली थी। उसके बाद 2 से 3 दिन तक सीआईयू के अधिकारियो ने ठाणे और विक्रोली में जांच की। वहाँ पर बंटी रेडियम और नंबर प्लेट बनाने की दुकान में काझी व अन्य अधिकारी गए थी। दुकानदार सावंत से पूछताछ कर उसे साथ लेकर जाते हुए सीसीटीवी फुटेज में नजर आया।

मीठी नदी से मिले सामानों की होगी फॉरेंसिक जांच

विस्फोटक कार मामला व मनसुख हिरेन हत्या मामले की जांच करते हुए एनआईए को वांद्रा के मीठी नदी से कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं अब इसकी जांच फॉरेंसिक लैब में की जाएगी। इसमें से बहुत सारे डाटा खराब हो गए होंगे लेकिन फिर भी विशेषज्ञों द्वारा इसमें से जानकारी निकाले जाने की जानकारी सूत्रों से मिली है। अपने खिलाफ सबूत न मिले इसलिए निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाझे ने क्राइम के दौरान इस्तेमाल किए गए सारे सामान, दस्तावेज मिठी नदी में फेंक दिया था। वाझे द्वारा बताए गए जगह पर 12 गोताखोरो ने मिलकर सारे सबूत ढूंढ निकाले। इसमे दो सीपीयू, दो हार्ड डिस्क, एक ही नंबर के दो नंबरप्लेट व अन्य सामान मिले। नदी में फेंकने से पहले वाझ ने भारी सामान को तोड़ दइया था। इसलिए डाटा मिलने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में जल्द से जल्द इसे फॉरेंसिक लैब भेजा गया। एनआईए के एसपी विक्रम खलोट के नेतृत्व में यह जांच मुहिम चलाई गई।

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