फिर एक साधु की हत्या, झोपड़ी में मिली लाश

फतेहाबाद. ऑनलाइन टीम : अब हरियाणा के फतेहाबाद में एक साधु की हत्या का मामला सामने आया है। हड़ौली गांव में 60 वर्षीय एक साधु की लाश  एक झोपड़ी में मिली। साधु का परिवार गांव में रहता है। मृतक साधु बाबा छिंदा सिंह के भतीजे जीता सिंह की शिकायत पर चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

महाराष्ट्र के पालघर, यूपी के बुलन्दशहर के बाद यह हिंसक घटना हुई है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार,  साधु बाबा छिंदा सिंह के साथ करीब 6 महीने पहले गांव के ही पूर्व सरपंच सुरेंद्र, रींझु, सुखदेव और संदीप ने कुटिया वाली जगह पर कब्जे को लेकर  साधु बाबा के साथ झगड़ा किया था। उस समय उन्होंने बाबा की कुटिया को तहस-नहस कर दिया था। इसी मामले को लेकर बाबा के साथ कई बार मारपीट की गई। इसके बाद भी बाबा इसी जगह पर एक झोपड़ी बनाकर रहने लगे थे और यहीं पर पूजा-पाठ करते थे। घटना के दिन (29 दिसम्बर) बाबा झोपड़ी से बाहर नहीं निकले तो मौके पर जाकर देखा गया तो मौके पर बाबा जी लाश चारपाई पर पड़ी थी। बाबा के मुंह पर चोट के निशान थे और गले पर भी चोट के निशान थे।

परिजनों को ग्रामीणों से घटना का पता चला तो मौके पर पहुंचकर परिजनों ने सड़क पर जाम लगाते हुए हंगामा किया और बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों और ग्रामीणों को शांत किया। पुलिस ने आरोपी  पूर्व सरपंच सहित 4 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है और शव का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

संतों ने आरोप लगाया कि साधुओं पर हमलों की लगातार घटती घटनाएं किसी साजिश की तरफ इशारा कर रही हैं। अखिल भारतीय हिंदू सेवा दल के संरक्षक आचार्य देव मुरारी बापू ने कहा कि यह निंदनीय एवं अक्षम्य अपराध है। हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

काशी विद्वत परिषद पश्चिमी भारत के प्रभारी कार्ष्णि नागेंद्र महाराज ने कहा, ‘संतों पर लगातार हमले होना घोर निंदनीय है। केंद्र और राज्य सरकार को संतों पर हमले रोकने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए और संतों व धर्माचार्यों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाना चाहिए।

निरंजनी अखाड़ा के महंत कुणाल गिरि महाराज ने कहा, ‘संत संन्यासी हो या फिर बैरागी। अगर इन पर हमले हो रहे हैं तो यह अत्यधिक चिंता का विषय है। क्योंकि, जिन संतों का समाज की सामान्य गतिविधियों से कुछ लेना-देना ही नहीं होता, उन पर हमले कर यूं ही उनकी हत्या कर देना समझ में नहीं आता। सरकार को संतों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। संतों के हत्यारों को गिरफ्तार करके फांसी दी जानी चाहिए। जिससे की आगे कोई भी ऐसी हिमाकत न कर सके। चरणाश्रम के महंत अधिकारी गुरुजी ने कहा कि संत सदा दुनिया के भले की सोचता है। अगर उस पर भी हमले होंगे तो सनातन धर्म की सुरक्षा कैसे होगी। संतों की सुरक्षा से ही सनातन धर्म की सुरक्षा हो सकेगी।

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