कोरोना को जल्दी पहचानने की तरकीब खोज ली गई, अब निपटना होगा आसान

दिल्ली , समाचार ऑनलाइन –  दिल्ली में कोरोना वायरस का मामला सामने आने के बाद शोधकर्ता भी संजीदा हो उठे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैम्ब्रिज और मेनचेस्टर यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने कोरोना वायरस को डिटेक्ट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम  Firetinas  डेवलप किया है। इस आर्टिफिशियल इंटेलिंजेंस सिस्टम की मदद से हाई बॉडी टेम्परेचर वाले लोगों को डिटेक्ट करके ये पता लगाया जा सकेगा कि वो इस वायरस से प्रभावित हैं कि नहीं। हाई बॉडी टेम्परेचर को कोरोना वायरस का लक्षण माना जाता है। ऐसे में आम बुखार और कोरोना वायरस से प्रभावित रोगी के बीच में फर्क करना काफी मुश्किल होता है। रिसर्चर्स का दावा है कि इस नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम के जरिए इस वायरस के शिकार लोगों को डिटेक्ट किया जा सकेगा।

फेफड़े पर हमला

वुहान के जिन्यिन्तान हॉस्पिटल में शुरुआती समय में जिन 99 मरीज़ों को लाया गया था, उनमें निमोनिया के लक्षण थे. इन मरीज़ों के फेफड़े में तकलीफ़ थी और फेफड़े की वो जगह, जहां से ऑक्सिजन रक्त में प्रवाह जाता है वहां पानी भर हुआ था.

दूसरे लक्षण थे…

82 लोगों को बुखार था.
81 को खांसी थी.
31 लोग सांस की तकलीफ़ से जूझ रहे थे.
11 को मांसपेशियों में दर्द था.
9 को भ्रम हो रहा था.
8 को सर दर्द.
5 लोगों के गले में फोड़े की समस्या थी.

इस आंकड़े में आलोक में शोधकर्ताओं की टीम दिन रात कोरोना से पार पाने की कोशिशों में लगी हुई हैं। फिलहाल Firetinas आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को चीनी स्कूल और अस्पतालों में लगाया गया है ताकि इस खतरनाक वायरस के शिकार रोगियों की पहचान की जा सकेगी।

कोरोनावायरस एक बेहद ही खतरनाक वायरस है जो तेजी से फैलता है, यही वजह है कि इसे फैलने से रोका जाना काफी जरूरी है। Firetinas में हाई परफॉर्मेंस IC (इंटिग्रेटेड सर्किट) लगाया गया है जो हर सेकेंड में 3 ट्रिलियन NPU कैल्कुलेट कर सकता है। ये 1,000 वर्ग फीट के क्षेत्र में 100 लोगों की जांच कर सकता है  इस सिस्टम के डेवलपर्स का दावा है कि Firetinas को फेस रिकॉग्निशन सिस्टम के साथ इंटिग्रेट किया जा सकता है।

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