भारत में कोरोनावायरस की पहली मरीज ने कहा-39 दिनों को याद करके ही डर लगता है, दुनिया से अलग-थलग पड़ी रही,  

 ऑनलाइन समाचार. तिरुवंतपुरम. –30 जनवरी को केरल के त्रिशूर की एक छात्रा में संक्रमण का देश में पहला मामला सामने आया था। इलाज के दौरान उस 39 दिनों तक आइसोलेशन में रखा गया। उसे अब  छुट्टी दे दी गई है। चीन के वुहान शहर के एक यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली इस 20 वर्षीय छात्रा ने कहा, ‘‘इतने लंबे समय तक अलग-थलग (आइसोलेशन) रहना आसान नहीं था।
छात्रा ने कहा, ‘‘13 जनवरी को जब वुहान यूनिवर्सिटी चार हफ्ते के लिए बंद हुई तो मैंने भारत जाने की सोची। हमने 23 जनवरी का टिकट बुक किया। ठीक एक दिन पहले ‘‘22 जनवरी को हमें अपने सीनियर्स से जानकारी मिली कि हवाई अड्डे बंद होने जा रहे हैं।  चीन में हर जगह सख्ती से जांच हो रही थी।  किसी तरह भारत लौटे। यहां आने के बाद नजदिकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने के लिए कहा गया था। मैंने अपने स्वास्थ्य केंद्र को 25 जनवरी को अपने पहुंचने की सूचना दी।  27 जनवरी को मेरे गले में खुजली हुई। मैंने तुरंत उन्हें सूचित किया। इसके बाद उन्होंने मुझे लेने के लिए एम्बुलेंस भेजा और मुझे एक सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान मेरी मां मेरे साथ थी।’’ छात्रा के मुताबिक, आइसोलेशन रुम में भर्ती किए जाने के बाद मेरे सैंपल्स जांच के लिए भेज दिए गए। मेरे सैंपल्स के साथ चार और लोगों के भी थे। उन चारों के रिजल्ट निगेटिव थे। लेकिन, मुझे कुछ नहीं बताया गया। इसके बाद मुझे संदेह होने लगा और 30 जनवरी को मुझे यह रिपोर्ट मिली कि त्रिशूर की एक छात्रा कोरोनावायरस से संक्रमित है।
 वुहान में पढ़ने वाले छात्र ऑनलाइन क्लास कर रहे
वुहान में पढ़ने वाले कई अन्य छात्रों की तरह, वह अभी चीन लौटने को लेकर स्पष्ट नहीं है। चार हफ्ते की छुट्टी के बाद यूनिवर्सिटी को 15 फरवरी को खोला जाना था। छात्रा ने बताया कि मेरी क्लास में 65 छात्र हैं, जिनमें 45 भारतीय हैं। अभी हम लोग ऑनलाइन क्लास कर रहे हैं। कोरोनावायरस के प्रभाव को देखते हुए यह शुरू किया गया है। अधिकारियों द्वारा प्रतिबंध हटाए जाने के बाद ही हम वुहान लौटेंगे।

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