Tanhaji Review : अजय देवगन और सैफ़ का दमदार अभिनय, 3 डी में जबरदस्त एक्शन जीत लेगा दिल

मुंबई : समाचार ऑनलाइन (असित मंडल ) – अजय देवगन, काजोल और सैफ अली खान स्टारर फिल्म ‘तानाजीः द अनसंग वॉरियर’ आज रिलीज हो गयी। फिल्म ‘तानाजी : द अनसंग वारियर’ वीर योद्धा तानाजी की कहानी है, जिन्होंने स्वराज के सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। ओम राउत ने तानाजी द अनसंग वारियर को डायरेक्ट किया है। तानाजी एक और ऐसी ऐतिहासिक फिल्म है, जो मराठा साम्राज्य की शूरवीरता को भव्य अंदाज में दर्शया गया है। इस कहानी में जांबाजी, रोमांस, थ्रिल, विश्वासघात जैसे सारे एलिमेंट्स हैं और उस पर सोने पर सुहागा कहलाने वाला 3 डी इफेक्ट्स जो पूरी फिल्म को शुरू से अंत तक देखने लायक बनाता है।

 

फिल्म की कहानी –

ये कहानी 4 फरवरी 1670 में हुए सिंहगढ़, जिसे तब कोणढाना के नाम से जाना जाता था, के युद्ध के बारे में है। इस युद्ध में तानाजी (अजय देवगन) और मराठा योद्धाओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज (शरद केलकर) के लिए औरंगजेब (ल्यूक केनी) और उसके खास आदमी उदयभान राठौड़ (सैफ अली खान) के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। कहानी की शुरुआत उस इतिहास के पन्नों से होती है, जब औरंगजेब पूरे हिंदुस्तान पर मुगलिया परचम को लहराने की रणनीति बनाता है। 17 वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज का परम मित्र और जांबाज योद्धा सूबेदार तानाजी मालसुरे अपनी पत्नी सावित्रीबाई के साथ बेटे की शादी की तयारियों में व्यस्त होते हैं। वो इस बात से अंजान है कि 23 किलों को मुगलों के हवाले कर देने के बावजूद मुगलिया सल्तनत की प्यास अभी तक नहीं मिटी है। औरंगजेब अपने खास प्यादे उदयभानु राठौड़ को भारी-भरकम सेना के साथ मराठा साम्राज्य का खत्म करने का आदेश देते हैं। ऐसे में इधर शिवाजी महाराज का आदेश मानकर तानाजी बेटे की शादी की परवाह किए बगैर भगवा पहनकर उदयभानु का सर कलम करने के लिए निकल पड़ते हैं। आगे क्या होगा उदयभान और तानाजी की लड़ाई का अंजाम? यही आप फिल्म में देखेंगे।

एक्टिंग –

जांबाज योद्धा के रूप में अजय देवगन हर तरह से फिट और फाइनेस्ट रहे हैं। युद्ध के दृश्यों में उनकी चपलता देखते बनती है। स्वराज्य के लिए उनका मर-मिटनेवाला इमोशन भी उनके चरित्र को खास बनाता है। काजोल के साथ उनकी केमेस्ट्री भी दिलचस्प है। उदयभानु राठोड के रूप में सैफ अली लाजवाब रहे हैं। कई जगहों पर वे अजय की तुलना में बीस साबित हुए हैं। तानाजी में खलनायक बेहद मजबूत है। सैफ ने अपने किरदार की बर्बरता को सशक्त तरीके से निभाया है। काजोल ने अपनी भूमिका को ईमनदारी से निभाया है। उन्हें और ज्यादा स्क्रीनस्पेस दिया जाना चाहिए था। शिवाजी के रूप में भले शरद केलकर की कदकाठी मैच न खाती हो, मगर अपने बॉडी लैंग्वेज और भाव-भंगिमा से उन्होंने इस किरदार को संस्मरणीय बनाया है।

डायरेक्शन –

ओम राउत के निर्देशन में बनी तानाजी: द अनसंग वॉरियर फिल्म अच्छा है। ओम का काम अच्छा है, डायरेक्शन और एडिटिंग भी अच्छी है। किरदारों को घुड़सवारी करते और लड़ाई करते हुए दिखाने के लिए VFX का इस्तेमाल किया गया है, जो ठीक-ठाक लगते है। इसके अलावा मराठाओं का खड़ी बोली में आपको रणवीर सिंह की बाजीराव मस्तानी की याद दिलाएगी।

 क्यों देखें फिल्म –

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसके एक्शन सीक्वेंस। जंग के मैदान में उतरे मराठा और मुगलों की जंग देखने लायक है। एक्शन सीक्वेंस की कोरियोग्राफी बेहद दमदार है। फिल्म का सेकंड हाफ आपको अपनी सीट से जोड़े रखता है। इसके अलावा फिल्म के सेट्स की भव्यता और विजुअल्स आपको अच्छे लगेंगे। साथ ही फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर और 3 डी इफ़ेक्ट फिल्म में जान डालता है।

पुणे समाचार की ओर से 3.5 स्टार –

कुल मिलाकर कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा तानाजी एक भव्य और मनोरंजक फिल्म है जिसे देखते हुए इतिहास की गौरवशाली परंपरा का ज्ञान होता है साथ ही हमारे इतिहास के शूरवीरों की गौरव गाथा का पता चलता है। इस फिल्म को पुणे समाचार की ओर से 3. 5 स्टार दिए जाते है।

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