सुप्रिया सुले का बड़ा बयान, कहा- जात पात की राजनीति के बारे में मुझे महाराष्ट्र नहीं दिल्ली में पता चला

ऑनलाइन टीम- जाति की राजनीति मुझे महाराष्ट्र में नहीं दिल्ली में पता चली। मैं जिस राज्य में मैं पली-बढ़ी हूं वहां ऐसा कभी नहीं हुआ। लेकिन दिल्ली में सांसद मुझसे पूछते थे कि तुम ठाकुर हो, गुर्जर हो? मैंने इस बारे में शरद पवार से भी पूछा था।रष्ट्रवादी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि इस पर तुम काम करो, चुन कर आयी हो ना फिर राज्य की समस्या को देखो, ऐसा बोलते थे। मैंने उस समय इसे गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन ये बातें समाज में कई लोगों के दिमाग में बसी हुई हैं। मुझे लगता था कि यह सब शिक्षा के माध्यम से चली जाती है। जाति की पहचान हो लेकिन उसमे कुछ गलत नहीं ऐसा उन्होने स्पष्ट किया।

सांसद सुप्रिया सुले महाराष्ट्र की राजनीति के भविष्य पर एक नज़र डालने के लिए आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोल रही थीं। इस मौके पर उन्होंने राजनीतिक दलों और जाति के सवाल का जवाब देते हुए अपने विचार व्यक्त किए। सांसद सुले ने कहा कि हम सभी साक्षर हैं लेकिन क्या हमने सीखा है कि साक्षरता और शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर है।

अगर अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा होगी, तो क्या राज्य में घरेलू हिंसा होगी? अगर कोई शिक्षित परिवार है, तो बेटा ही हो ऐसा प्रश्न कहाँ आता है। इस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उसके बाद बदलाव देखने को मिलेगा, सुले ने कहा। जाति की जानकारी, एक अलग पहचान रखने में कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन अगर राज्य राजनीतिक तत्वों के शोषण से परेशान है तो यह चिंताजनक है। सांसद सुले ने विचार व्यक्त किया है कि बढ़ती कड़वाहट किसी भी राज्य, देश और प्रगति के लिए खतरनाक है।

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