अचानक याराना…चीन ने कहा-हम भारत के साथ, ब्रिक्स पर मिलाया हाथ   

नई दिल्ली. ऑनलाइन टीम : भारत-चीन सीमा पर लगभग साल भर तनाव बना रहा। एक तरफ कोरोना से, तो दूसरी तरफ चीन से, जंग दोनों ओर ही जारी रही, लेकिन भारत ने अपने आप को अडिग रखा। दोनों ही मोर्चों पर सफलता हासिल की। अब चीन और कोरोना दोनों बैकफुट पर हैं।

पैंगोंग झील और फिर अन्य जगहों से डिसइंगेजमेंट की रिपोर्ट्स के बीच, चीन  ‘सहयोग’ और ‘मानवता’ की राग अलापने लगा है। इसी बीच, ब्रिक्स सम्मेलन की बात आई। दरअसल, भारत को इस साल 2021 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता मिली  है। 19 फरवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में BRICS 2021 की वेबसाइट लॉन्च की थी।
बता दें कि ब्रिक्स पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से बना समूह है।

2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट (जीएफसी) के समय बने इस समूह का मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सहयोग, नीति समन्वयन और राजनीतिक संवाद को बढ़ावा देना है। समूह का गठन 2009 में हुए पहले राष्ट्राध्यक्ष स्तरीय शिखर सम्मेलन के साथ हुआ था। इसके बाद हर साल वैश्विक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए समूह की बैठक होती रही। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, “भारत के इस साल ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन का चीन समर्थन करता है। (चीन) भारत व अन्य ब्रिक्स देशों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में संवाद और सहयोग बढ़ाना चाहता है। अर्थव्यवस्था, राजनीति और मानवता के ‘तीन पहियों वाली पहल’ को भी मजबूत करना चाहता है।”

सूत्रों के अनुसार, अगर अगले कुछ महीनों में कोविड काबू में रहा, तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत आ सकते हैं। चीन ने कहा कि वह ब्रिक्स देशों के बीच एकजुटता और सहयोग को मजबूत करना चाहता है। साफ है कि  चीन से आए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के बड़े प्रस्तावों की बारीकी से जांच परख होगी। इसके लिए एक कोऑर्डिनेशन कमिटी भी बनाई गई है।
ध्यान रहे, चीन ने ब्रिक्स देशों का सम्मेलन ऐसे वक्त में किया है जब सीमा पर उसकी सेना कदम पीछे खींच रही है। दोनों देशों के सैन्य कमांडर्स के बीच हुए समझौते के अनुसार, बॉर्डर पर तनाव से पहले वाली स्थिति बहाल करने की कोशिशें हो रही हैं। हालांकि चीन के हर कदम को भारत बेहद सावधानी से देख रहा है।

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