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सोनिया गांधी को रायबरेली में ही लगा झटका, 35 पदाधिकारियों ने भेजा इस्तीफा

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रायबरेली. ऑनलाइन टीम : राजनीति और अवसरवादिता से इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस में यह कुछ ज्यादा ही सिर चढ़कर बोल रहा है। बगावत की आंच कई बार महसूस की गई, लेकिन उसे दबाया जाता रहा। अब निचले स्तर से बगावत शुरू हो गई है और यह कांग्रेस की राजनीतिक सेहत के लिए सही नहीं। सोनिया गांधी  के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में घमासान मच गया है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव व पूर्व जिला प्रभारी व मौजूदा पीसीसी सदस्य शिव कुमार पाण्डेय समेत 35 पदाधिकारियों ने सांसद सोनिया गांधी को इस्तीफा वाला पत्र भेजा है। इनका इस्तीफा मंजूर किया गया या नहीं, उसको लेकर जिला के पदाधिकारी तक कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।

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रायबरेली जिला स्वर्गीय इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी के संसदीय काल के समय से कांग्रेस का राजनीतिक घर माना जाता रहा है। जिले के विकास को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने काफी कुछ किया लेकिन समय के साथ उनके सपनों को धूलधूसरित करने में कोई कोताही नहीं बरती गई। यही कारण है कि मौके पर चौका लगाता हुए अटल जयंती पर अमेठी आई केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बयान दिया था कि 2024 में रायबरेली में भी बीजेपी का कमल खिलेगा, उसके ठीक 13वें दिन कांग्रेस में इस तरह की बगावत ने राजनैतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं।

पीसीसी सदस्य शिव कुमार पाण्डेय ने बताया कि पार्टी को कमजोर करने के लिए जिलाध्यक्ष व अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी कार्य कर रहे है। जिसमें हाल में ही गठित ब्लाक के नई कार्यकारिणी में पुराने कार्यकर्ताओं को तवज्जो न देकर अन्य पार्टी से आए लोगों पर भरोसा करते हुए उनको ब्लाक के महत्वपूर्ण पद पर बैठाया गया है। जिसमे कई अनुभवहीन हैं, जिससे पार्टी की नींव कमजोर हो रही है। इन सभी ने पार्टी की नई कार्यकारिणी से असंतुष्ट होने के साथ-साथ कई कार्यकर्ताओं के किनारे किए जाने पर आपत्ति जताई है।

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