…तो क्या शिवसेना सत्ता के लिए लाचार चुपचाप बैठे रहेगी : भाजपा का शिवसेना से सवाल

पुणे : ऑनलाइन टीम – पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र में औरंगाबाद नामांकरण को लेकर माहौल गरम है। भाजपा लगातार औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर रखने की मांग करती आई है। इस बीच अब मनसे भी आक्रामक हो गयी है। मनसे ने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार को 26 जनवरी तक का समयसीमा भी दे दी है।

इधर बुधवार को कैबिनेट की बैठक के बाद सीएमओ ने अपने ट्विटर हैंडल पर संभाजीनगर (औरंगाबाद) का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया, जिसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात ने शिवसेना को बताया कि वह किसी भी शहर का नाम बदलने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। एक ओर विपक्षी भाजपा औरंगाबाद का नाम बदलने को लेकर सत्तारूढ़ शिवसेना और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फंसा रही है, वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है।

इस बीच भाजपा ने फिर से शिवसेना पर हमला किया है। भाजपा ने कहा कांग्रेस के विरोध के बाद अब शिवसेना क्या कहेगी? बिना कुछ कहे क्या सीधे अब नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सीधे कैबिनेट में लाया जाएगा। और ऐसे में क्या जवाब दिया जाएगा? क्या सत्ता के लिए शिवसेना बेबसी है? भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने यह सवाल सत्ताधारी शिवसेना से पूछा है।

राज्य में कांग्रेस-एनसीपी औरंगाबाद के नाम बदलने के विरोध में है। शिवसेना संभाजीनगर का नाम रखने के लिए तैयार है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने कहा कि हम दोहराते हैं कि हम सामाजिक समरसता के लिए किसी भी शहर के नाम बदलने का कड़ा विरोध करते हैं।

दरअसल बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल ने औरंगाबाद में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और कैंसर अस्पताल में 165 नए बेड और 360 पदों के सृजन को मंजूरी दी। कांग्रेस मंत्री अमित देशमुख के विभाग के फैसले में औरंगाबाद को संभाजीनगर बताया गया है। उन्होंने घोषणा की है कि औरंगाबाद के नाम बदलने के लिए कांग्रेस स्पष्ट रूप से विरोध कर रही थी। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय ने औरंगाबाद को संभाजीनगर के रूप में उल्लेख किया। जसिके बाद राजस्व मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने ट्वीट किया अपनी नाराजगी जाहिर की।

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