अपनी ही सरकार पर सिद्धू का वार, कहा- हम कर सकते हैं बेड़ा पार   

चंडीगढ़. ऑनलाइन टीम : क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू अपनी ही सरकार को घेरने पर आमादा हैं। एक बात तो तय है कि जिस तरह उन्होंने अनेक समस्याओं को गिनाते हुए सरकार की विफलता के आरोप लगाए हैं और उसका हल भी अपने पास होने का दावा करते हैं, तो उनके मंसूबों की पोल खुलती है। किसान आंदोलन पर चुप्पी साधे रहे, लेकिन किसानों की बात कर रहे हैं।

पंजाब विधानसभा में बजट पेश होने से पहले एक वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया है कि पंजाब को मिलने वाले राजस्व का एक फीसदी लोगों की जेब में जा रहा है, जिसका खामियाजा सूबे के 99 फीसदी लोगों को झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि पंजाब पर इस साल 2.48 लाख करोड़ रुपये का ऋण हो जाएगा। सरकारी संस्थाओं के ऋण को मिलाकर यह राशि 3.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का राजस्व तो आ रहा है, लेकिन यह निजी हाथों में जा रहा है। उनका यह आरोप ऐसे समय में सामने आया है, जब 5 मार्च को वहां की सरकार बजट पेश करने वाली है।

कुल मिलाकर उन्हें सरकारी तंत्र कमजोर नजर आ रहा है। हर कार्य में लापरवाही झलक रही है। सिद्धू तमिलनाडु सरकार का उदाहरण देते हैं और कहते हैं कि वहां सिर्फ एक्साइज से ही आय 32,000 करोड़ रुपये है, जबकि  पंजाब सरकार का कुल राजस्व 32 हजार करोड़ रुपये का है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजाब कहां है।  उन्होंने कहा कि शराब का कारोबार करना है तो करो, लेकिन इससे होने वाली आय शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च की जानी चाहिए। यह पैसा निजी हाथों में तो बिलकुल नहीं जाना चाहिए।

इसके अलावा राज्य में परिवहन व्यवस्था के बहाने सीधे बादल परिवार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा  पंजाब रोडवेज परिवहन निगम 500 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा है, जबकि दो कंपनियों से बादल परिवार ने आठ कंपनियां खोल ली हैं। उन्होंने रेत और खनन माफिया को सरकार के लिए लाइलाज बताते हुए हल अपने पास होने का दावा किया। सवाल यह है कि सिद्धू किसका भला चाहते हैं, सरकार का या परिवार की। अगर उनके पास हर मर्ज की दवा है, तो खामोश क्यों है, शिकायतों की जरूरत क्या है। अपनी सरकार है, सीधे हस्तक्षेप करने का नुस्खा अपना सकते हैं। या फिर कहीं पर निगाहें, कहीं निशाना है, कहीं कुर्सी तो बहाना नहीं।

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