Serum Institute Story | रेस का घोड़ा तैयार करने वाली फैक्टरी से सीरम इंस्टीट्यूट ; 100 करोड़ का डोज असंभव रूप से प्राप्त हुआ 

पुणे (Pune news) : 2001 में सीरम (Serum Institute Story) ने 35 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई थी। अब सीरम ने 165 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई है। सीरम (Serum Institute Story) ने अकेले 88% कोरोना वैक्सीन (corona vaccine) की डोज उपलब्ध कराई है।

2019 में दुनिया को अपने पंजे में लेने वाले कोरोना वायरस (corona virus) का जन्म हुआ। 2020 की शुरुआत में देखते-देखते यह वायरस दुनिया भर में फैलने लगा।  तेज़ी से लोगों की मौत होने लगी। चीन (China) पर सारा आरोप लगा।  लंबा-लंबा लॉकडाउन (Lockdown) लगाया गया।  कोरोना को रोकने के लिए यह पर्याप्त नहीं था।  कोरोना वैक्सीन (corona vaccine) की आवश्यकता थी।
भारत सहित चीन, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देश में कोरोना वैक्सीन पर रिसर्च (Research) शुरू हो गई। कई देशों के पास बड़ा बनने का  मौका था।  भारत में को-वैक्सीन (Covaxin) की टेस्टिंग होने लगी। इससे पहले ब्रिटेन के ऑस्ट्रिजेनिका (UK Austragenica) ने वैक्सीन का कॉम्बिनेशन (Combination) तैयार कर लिया था।  पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट (Serum Institute) के अलावा यह वैक्सीन (Vaccine) इतने बड़े पैमाने पर बनाना और उसका ट्रायल करना संभव नहीं था।
सीरम इंस्टिट्यूट दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी थी। सारी दुनिया की उम्मीदें इसी कंपनी से लगी थी।  कोविशील्ड (Covishield) पर काम शुरू ही गया। टेस्टिंग (Testing) शुरू हो गई और इसमें सफलता भी मिली। इसके बाद वैक्सीन लोगों को देने का निर्णय लिया गया।  देश की आबादी काफी ज्यादा है।  ब्रिटेन (UK) और दुनिया की बड़ी संस्थाओं के साथ करार किया गया।  दुनिया भर में वैक्सीन (Vaccine) की सप्लाई की थी।
सीरम ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। देश में अब तक 100 करोड़ लोगों को वैक्सीन (Vaccine) दिया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने में भारत बायोटेक, सीरम इन दो कंपनियों का बड़ा योगदान है।  अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) का ब्रिटेन का दौरा बढ़ गया है।  सीरम नहीं होता तो देश के लिए इस लक्ष को पूरा करना काफी मुश्किल हो गया होता। चलिए जानते है इस कंपनी के उद्गम को लेकर।
ब्रिटिश काल में 19 वी शताब्दी में पूनावाला (Poonawalla) परिवार पुणे आया था।  इस काल में पारसी परिवार (Parsi family) भारत में स्थलांतरित कर रहे थे।  प्रशासन से व्यवसाय में ये लोग जम गए। इतना ही नहीं जिस शहर में ये लोग रहते थे उस शहर का नाम इनके सरनेम में देखा जाता है।  इसलिए अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) का नाम पुणे पर पड़ा है।
स्वतंत्रता से पहले पूनावाला परिवार कंस्ट्रक्शन (construction) के बिज़नेस में थे।  लेकिन उन्हें घोड़े के व्यवसाय (horse business) के लिए पहचाना जाता था। सोली पूनावाला (Soli Poonawalla) ने घोड़ों का व्यवसाय शुरू किया। उनके पास प्रशिक्षित किये गए घोड़े रेस के लिए इस्तेमाल किये जाते थे।  इसका फायदा यह हुआ कि पूनावाला की पहचान बड़े बड़े उधोगपतियों से हो गई।
इसके बाद उद्योग को बढ़ाने का विचार किया गया। उस वक़्त उनका ध्यान वैक्सीन (Vaccine) बनाने की तरफ गया। उस वक़्त सरकार के नियंत्रण में वैक्सीन बनाई जाती थी।  ऐसे में मौके कम होने के साथ जोखिम भी ज्यादा था। यह विचार सायरस पूनावाला (Cyrus Poonawalla) के दिमाग में आया था।
इसकी मुख्य वजह यह थी कि मुंबई के हाफकिन में पूनावाला (Poonawalla) के फर्म में तैयार घोड़े दिए जाते थे। इन घोड़ों से सर्पदंश और टिटनेस की वैक्सीन बनाई जाती थी।  जब सायरस को यह समझ आया तब उन्होंने इन घोड़ों का इस्तेमाल खुद के लिए करने का निर्णय लिया और फिर 1966 में सीरम इंस्टिट्यूट (Serum Institute) की स्थापना हुई।
इसके बाद  सीरम ने कई बीमारियों के लिए वैक्सीन बनाने की शुरुआत की। इंटरनेशनल (International) लेवल पर पोलियो निर्मूलन मुहिम की शुरुआत हुई और सीरम को बड़ा मंच मिला। सायरस ने अमेरिका (America) और यूरोप (Europe) की तकनीक लाकर अपना उत्पादन बढ़ाया। साथ ही कीमत भी कम रखी। सीरम की शुरुआत 5 लाख रुपए के निवेश से की थी. आज सायरस (Cyrus Poonawalla) दुनिया के 165वे और देश के छठे सबसे अमीर व्यक्ति है।
वर्ष 2012 में सीरम ने डच सरकारी वैक्सीन निर्माता कंपनी को खरीद लिया और दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी बन गई।   2001 में सीरम ने 35 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई थी. अब सीरम ने 165 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई है।  सीरम ने अकेले 88% कोरोना वैक्सीन  (Corona Vaccine) की डोज उपलब्ध कराई है।

 

 

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