पुणे के शिवाजीनगर पुलिस मुख्यालय में अजीत पवार के काम का जूनून देखकर सीनियर अधिकारी ‘अवाक’; उपमुख्यमंत्री ने कहा –  मुझे ऐसे काम का निरिक्षण करने के लिए बुलाया तो मैं बड़ी बारीकी से सब कुछ देखता हूं,  मेरी भाषा में कहु तो यह ‘छा-छू काम’ है

पुणे, 11 जून : एक बार फिर से उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के काम का जूनून पुणे पुलिस व अति वरिष्ठ अधिकारियों को देखने को मिला। पुलिस मुख्यालय में बिल्डिंग के रिपेरिंग वर्क का निरिक्षण करने आये अजीत पवार अचानक से भड़क गए।  उन्होंने कहा, मुझे ऐसे काम का निरिक्षण करने के लिए बुलाया तो मैं बड़ी बारीकी से सब कुछ देखता हूं।  मेरी भाषा में कहु तो यह छा-छू काम है।  इस कांट्रेक्टर ने पुलिस का ऐसा काम किया है तो बाकी क्या करता होगा? ऐसा कहते हुए पुलिस अधिकारियों को अजीत पवार ने सुबह-सुबह खरी खोटी सुनाई।  इस वाकये के बाद पुणे पुलिस में खलबली मच गई है।  इस बीच कॉन्टैक्टर को बुलाकर कहा कि पुलिस का असली काम करू क्या ? यह कहते हुए जमकर फटकार लगाई।

शिवाजीनगर के पुणे पुलिस मुख्यालय की बिल्डिंग का रिनोवेशन का कामकाज देखने व कोविड में योगदान देने वाले कर्मचारियों को अजीत  पवार के हाथों सम्मानित करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था।  इसी मौके पर सुबह सुबह अजीत पवार भड़क गए। निरिक्षण के दौरान ये सब हुआ।

उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को स्पष्ट बात करने के लिए जाना जाता है।  उनके सामने काम को लेकर किसी को नहीं बख्सा जाता है।  इसमें पार्टी के पदाधिकारी हो या कोई सरकारी अधिकारी।  हमेशा की तरह इसका अनुभव पुणे पुलिस को भी करना पड़ा है।
मुख्यालय में आज सुबह साढ़े 7 बजे अजीत पवार बिल्डिंग की रिनोवेशन का काम देख रहे थे।

लेकिन इंजीनियर ने कहा गलती की और आखिर क्या हुआ ? यह बात अजीत पवार को तुरंत समझ आ गई और उन्होंने सीधे सीनियर पुलिस अधिकारियों को नाम से बुलाकर कहा कि इस तरह के काम के निरिक्षण के लिए बुलाया है।  मैं हर चीज बारीकी से देखता हूं।  मेरी भाषा में बोलू तो यह काम  छा-छू काम है।  इन कॉन्ट्रैक्टर ने पुलिस का ऐसा काम किया है तो बाकी जगह कैसा काम करते होंगे ? हमारे बारामती में देखे काम कैसा होता है।

इस दौरान संबंधित कॉन्ट्रैक्टर को बुलाने के लिए कहा और उसे जमकर फटकार लगाई।  अजीत  पवार का यह रूप देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए।  क्या बोले क्या नहीं बोले? कुछ समझ नहीं आ रहा था।  लेकिन इसे लेकर जूनियर से सीनियर अधिकारियों में चर्चा शुरू हो गई थी।

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