23 मई से 11 अक्टूबर तक शनि चलेंगे उल्टी चाल, कई लोग होंगे बेहाल

ऑनलाइन टीम. नई दिल्ली : न्यायकारक ग्रह शनि 23 मई को वक्री होने जा रहे हैं। 11 अक्टूबर  को मार्गी होंगे। शनि देव जब वक्री होते हैं तो ज्योतिष शास्त्र में इसका फल शुभ नहीं माना जाता है। इस बार शनि 141 दिनों के लिए वक्री हो रहे हैं। जिस राशि में शनि वक्री हो रहे हैं उस पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। वर्तमान समय में शनि मकर राशि में हैं और इसी राशि में वक्री हो रहे हैं। भारत देश की राशि कर्क है। अपनी ही राशि मकर में विराजमान होने के कारण शनि का वक्री होना शासक और जनता, दोनों को पीड़ित करेगा। शनि के वक्री होने के मौसम पर भी प्रभाव देखने को मिलते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में शनि के वक्री होने को एक महत्वपूर्ण घटना के तौर पर देखा जाता है। शनि वक्री होने से सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव रहेगा।  पंचांग के अनुसार शनि 23 मई रविवार को दोपहर दो बजकर 53 मिनट पर मकर राशि में वक्री हो रहे हैं। 11 अक्टूबर 2021 सोमवार को सुबह सात बजकर 44 मिनट पर शनि मकर राशि में मार्गी होंगे। इस प्रकार, 141 दिनों तक शनि उल्टी चाल चलेंगे। इस दौरान अशुभ फलों को रोकने के लिये गणेश और हनुमान पूजा से लाभ होगा। आइए जानें कि किस राशि पर

क्या प्रभाव पड़ सकता है-

मेष : आय में वृद्धि पर नए व्यापार में भय हो सकता है।
वृष : धन को लेकर  कभी खुशी, कभी संकट हो सकता है।
मिथुन : कार्यक्षेत्र में विरोध।  वाणी संयम जरूरी। मित्रों से विवाद।
कर्क : कानूनी विवाद,  अनिद्रा से तनाव। विदेश संपर्क से लाभ होगा।
सिंह :  शत्रु परेशान कर सकते हैं।  धन की कमी महसूस करेंगे।
कन्या : संतान सुख में बाधा। आय में कमी से आएगी परेशानी।
तुला : अध्यात्म में रुचि होगी, पर कोई गलत निर्णय ले सकते हैं।
वृश्चिक :  संचित धन में कमी। बुजुर्गों की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है।
धनु :  बुजुर्गों को सम्मान दें। सेहत को लेकर तनाव हो सकता है।
मकर : सेहत को लेकर तनाव रहेगा। वाहन सुख में कमी होगी।
कुंभ : सेहत पर ध्यान दें।  धन अचानक मिल भी सकता है।
मीन :  रुका हुआ धन मिल सकता है, विदेशी मित्र से लाभ होने के योग।

इस दौरान यह करें उपाय

शनि देव की अशुभता को दूर करने के लिए इन मंत्रों का जप करें और शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल चढ़ाएं।

– ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:
– ऊं ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:
– ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:

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