Pune Police | पुणे के ‘उन’ 19 पुलिस अधिकारी और अंमलदारों पर ‘घोर’ अन्याय? जानें पूरा मामला

पुणे (Pune News) : Pune Police | हर साल की तरह पुलिस महासंचालक कार्यालय (DGP Office) ने पुणे पुलिस आयुक्तालय (Pune Police Commissionerate) की ओर से ‘राष्ट्रपति पुलिस पदक’ (Presidental Police Medal) के लिए निर्धारित मानदंड पूर्ण करनेवाले शहर पुलिस दल (Pune Police) के उल्लेखनीय/गुणवत्तापूर्ण सेवा किए पुलिस अधिकारी और पुलिस अंमलदार के नामों के प्रस्ताव 11 अक्टूबर 2021 तक मांगे थे। हालांकि शहर पुलिस दल (City Police Team) के बाबुगिरी की वजह से जोन-1 और जोन-2 के लगभग 19 पुलिस अधिकारी और अंमलदारों के नाम पुणे आयुक्तालय की ओर से पुलिस महासंचालक कार्यालय के पास नहीं भेजे जाने की बात सामने आई है।

 

पुलिस आयुक्तालय की ओर से 25 से अधिक पुलिस अधिकारी (Police Officer) और अंमलदारों (Policeman) के नाम की सिफारिश पुलिस महासंचालक कार्यालय (DGP Office) के पास की गई है। इसमें मुख्यालय, यातायात विभाग (Traffic Department), क्राइम ब्रांच (Crime Branch), स्पेशल ब्रांच (Special Branch), जोन-3 ( Zone-3), जोन-4 ( Zone-4) और जोन-5 (Zone-5) के पुलिस शामिल हैं। पुणे पुलिस आयुक्तालय के प्रशासन विभाग (Administration Department) की ओर से हर ब्रांच और विभाग को निर्धारित मानदंड पूर्ण कर रहे संबंधित पुलिस के नाम की सिफारिश तत्काल भेजें ऐसा कहा गया था। 11 अक्टूबर तक पुलिस  महासंचालक कार्यालय में सभी नामों की जानकारी देना जरूरी है। हालांकि हमेशा की तरह इस बार भी नाम बताने में देरी हुई।

 

आयुक्तालय की ओर से अन्य सभी ब्रांच की जानकारी पुणे पुलिस आयुक्तालय (Pune Police Commissionerate) के पास 20 अक्टूबर से पहले  आई। उसी दिन अति वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की समिति बैठक संपन्न हुई। इसमें 25 से अधिक नाम की सिफारिश कर उसे पुलिस महासंचालक कार्यालय के पास भेजने की मंजूरी दी गई।  इस बैठक में सह पुलिस आयुक्त डॉ. रवींद्र शिसवे (Police Commissioner Dr. Ravindra Shisve), अपर पुलिस आयुक्त (प्रशासन) जालिंदर सुपेकर (Additional Commissioner of Police Jalinder Supekar) के साथ अन्य कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

 

इस बीच बैठक तक जोन-1 और जोन-2 के पुलिस अधिकारी और अंमलदारों की सिफारिश की लिस्ट पुणे पुलिस आयुक्त (Pune Police) के प्रशासन विभाग के पास प्राप्त नहीं हुई। इसलिए जोन-1 और जोन-2 के 19 लोगों  का विचार भी बैठक में नहीं हुआ। जोन-1 और जोन-2 के कार्यालय के बाबू लोगों की ओर से लिस्ट 20 अक्टूबर को शाम यानी कि देरी से पुणे आयुक्तालय के प्रशासन विभाग के पास आई। उसकी रसीद भी जोन-1 और जोन-2 के बाबू लोगों को न देने की जानकारी सामने आई है।

 

बाबूगिरी की वजह से जोन-1 और जोन-2 के संबंधित 19 पुलिस पर घोर अन्याय होने की चर्चा पुणे पुलिस (Pune Police) के गलियारों में गूंज रही है। इस बारे में कुछ पुलिस अंमलदारों ने सिधा पुलिस महासंचालक को सोशल मीडिया के माध्यम से देने की बात कही जा रही है। पुलिस दल (Police Team) में सेवानिवृत्त की चौखट पर खड़े लोग राष्ट्रपति पुलिस पदक का सपना देखते हैं। कई पुलिस सालों साल पुलिस दल में रहते हुए अपना कर्तव्य निभाते हैं लेकिन उन्हे फल नहीं मिलता है।

 

ऐसे समय में निराश हुए पुलिस फिर से दूसरे साल पदक हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन यहां बाबुगिरी की वजह से उनकी किस्मत का फैसला अंधकारमय हो गया है। जोन-1 और जोन-2 के संबंधित क्लर्क ने समय पर पुलिस आयुक्तालय प्रशासन विभाग के पास नाम न भेजे जाने से घोर अन्याय के शिकार होने की भावना संबंधित पुलिस अधिकारी और अंमलदार व्यक्त कर रहे हैं।

 

पुलिस महासंचालक कार्यालय ने 11 अक्टूबर 2021 तक नाम की सिफारिश भेजने का परिपत्र 25 सितंबर 2021 को निकाला था। ऐसे में 11 अक्टूबर 2021 तक पुणे आयुक्तालय की ओर से डीजी ऑफिस तक जानकारी नहीं भेजी गई। 20 अक्टूबर को पुणे पुलिस आयुक्तालय की ओर से नाम की सिफारिश  लिस्ट भेजने की जानकारी सूत्रों से मिल रही है।

 

इस बीच पुणे पुलिस आयुक्तालय की ओर से भेजे गए लिस्ट में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी क नाम है, इसलिए लिस्ट भेजने में थोड़ी जल्दबाजी करने की चर्चा भी बाबू लोगों में है। पुलिस दल में एक दूसरे पर अन्याय होने की चर्चा गांव भर में होती है लेकिन यहाँ तो 19 लोगों पर अन्याय होते दिख रहा है। इसलिए पुणे पुलिस दल (Pune Police Team) में इस बात की जोरदार चर्चा शुरू है।

 

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