Pune News | पुणे के नामी हॉस्पिटल में किडनीग्रस्त मरीज की प्रताड़ना

विधायक लक्ष्मण जगताप ने की स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे से जांच की मांग

पिंपरी : संवाददाता –  Pune News | पुणे के जहांगीर चैरिटी अस्पताल (Jehangir Charity Hospital) में, जिले के कोने-कोने से किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney transplant) के लिए आने वाले मरीजों को कहा जाता है कि “पहले भुगतान करें, उसके बाद ही ट्रांसप्लांट सर्जरी की जाएगी,”। डॉ श्रीनिवास (Dr. Srinivas) को अंबिके की ओर से कहा जा रहा है कि भुगतान नहीं करने वाले मरीजों को इलाज नहीं किया जाएगा। यह एक बहुत ही गंभीर मामला है और धर्मार्थ अस्पतालों द्वारा की जाने वाली किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए एक मानक निर्धारित किया जाना चाहिए। भाजपा विधायक लक्ष्मण जगताप (Laxman Jagtap) ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे (Rajesh Tope) से राज्य के सभी धर्मार्थ अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण के लिए महात्मा फुले जन आरोग्य योजना (Mahatma Phule Jan Arogya Yojana) लागू करने पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। (Pune News | Torture of a kidney patient in a reputed hospital in Pune)

इस संबंध में विधायक लक्ष्मण जगताप ने स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे को ईमेल से भेजे ज्ञापन में कहा कि, ‘जहांगीर चैरिटी अस्पताल पुणे का सबसे बड़ा अस्पताल है। इस अस्पताल में किडनी की बीमारी से पीड़ित सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। जिले के कोने-कोने और गांवों से बड़ी संख्या में गरीब मरीज आ रहे हैं। इन मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत है। मगर जहांगीर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को पहले भुगतान करें, उसके बाद ही हम किडनी प्रत्यारोपण की सर्जरी करेंगे, ऐसा सर्जन डॉ श्रीनिवास अंबिके द्वारा कहा जा रहा है। इस बारे में कई शिकायतें मिल रही हैं कि मरीजों और उनके रिश्तेदारों को अस्पष्ट जवाब देकर किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी में देरी की जा रही है।

पिछले साल, पुणे चैरिटी कमिश्नर दिलीप देशमुख (Pune Charity Commissioner Dilip Deshmukh) ने पुणे और पिंपरी चिंचवड़ हॉस्पिटल एसोसिएशन के साथ-साथ जिला अस्पताल और जिला परिषद और अन्य चिकित्सा अधिकारियों की उपस्थिति में पुणे में एक बैठक की। बैठक में चैरिटी अस्पतालों को धन की कमी के कारण किसी भी मरीज की किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी को स्थगित नहीं करने का भी निर्देश दिया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि ऐसे मरीजों को पीएमओ, सीएमआरएफ, विभिन्न सामाजिक संगठनों और चैरिटी कमिश्नर की ओर से आईपीएफ में शामिल कर प्रत्यारोपण सर्जरी करानी चाहिए। हालांकि, तस्वीर यह है कि जहांगीर अस्पताल चैरिटी कमिश्नर के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। मरीजों की मदद करने के बजाय जहांगीर अस्पताल की भूमिका उन्हें आर्थिक बोझ का खामियाजा भुगतने के लिए मजबूर करना है। एक ओर जहां यह धर्मार्थ अस्पतालों का कर्तव्य है कि वह समाज के गरीब मरीजों को रोगी सेवा को ईश्वर की सांस मानकर चिकित्सा सहायता प्रदान करें, वहीं जहांगीर अस्पताल धर्मार्थ सरकारी योजना के लाभ से वंचित कर मरीजों की देखभाल कर रहा है।

मरीजों के परिजनों से आर्थिक रूप से रंगदारी वसूलना और समय पर सर्जरी करने से मना किया जा रहा है। इस गंभीरता को देखते हुए चैरिटेबल अस्पतालों द्वारा की जाने वाली किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए निश्चित दर तय करके एक मानक नियमन बनाया जाना चाहिए। साथ ही सभी धर्मार्थ अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण के लिए महात्मा फुले जनारोग्य योजना लागू करने के संबंध में आपके स्तर से तत्काल आदेश जारी होने पर किडनी रोग से पीड़ित गरीब मरीजों का समय पर इलाज किया जाएगा। उनके पास पैसे नहीं हैं इसलिए इलाज नहीं रुकेगा। हमें इस मामले में गरीब मरीजों को न्याय और राहत देनी चाहिए। इसी तरह जहांगीर चैरिटी अस्पताल की किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी प्रक्रिया की जांच उच्च स्तरीय चिकित्सा अधिकारी से कराएं। विधायक जगताप ने स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि अस्पताल के मेडिकल बिलों का एक सक्षम निकाय द्वारा ऑडिट किया जाए।

 

Web Title : Pune News | Torture of a kidney patient in a reputed hospital in Pune

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