Pune News | नगर निगम चुनावों में प्रस्थापितों को मेहनतकशों की चुनौती

मेहनतकशों के नेता बाबा कांबले का ऐलान; कहा प्रस्थापित दलों ने की गरीबों की उपेक्षा

पिंपरी : Pune News | पिंपरी चिंचवड़ (Pimpri Chinchwad) में रिक्शाचालकों, फेरीवालों, घरेलू मजदूरों, निर्माण श्रमिकों, असंगठित कामगारों और कई मेहनतकश लोगों की समस्याओं से सभी स्थापित राजनीतिक दलों ने मुंह फेर रखा हैं। एक स्थिति ऐसी भी होती है कि चुनाव (Election) में मेहनतकश लोगों के वोट की जरूरत होती है, लेकिन उनके मसलों को सुलझाने में कोई रूचि नहीं है। इसलिए मजदूरों, झुग्गी बस्तियों, नागरिक मुद्दों और पिछड़े वर्ग ओबीसी के सभी मुद्दों पर राजनीतिक स्टैंड लेना जरूरी है। आने वाले चुनावों में मेहनतकश एक सक्षम राजनीतिक भूमिका निभाने जा रहे हैं। मेहनतकश लोगों के नेता बाबा कांबले (Baba Kamble) ने एक प्रेस कांफ्रेंस (press conference) में ऐलान किया कि आगामी चुनावों में हमारे उम्मीदवार उतारकर प्रस्थापित उम्मीदवारों को चुनौती (Pune News) देंगे।

 

इस प्रेस कांफ्रेंस ने बहुजन सम्राट सेना के अध्यक्ष संतोष निसर्गंध, शिवशाही युवा संगठन के अध्यक्ष शिवशंकर उबाले, अनिता सावले, कष्टकरी कामगार पंचायत के कार्याध्यक्ष बलीराम काकडे, मराठा सेवा समिति के सदाशिव तलेकर, घरकाम महिला सभा की अध्यक्ष आशा कांबले, मधुरा डांगे, टपरी, पथारी, हातगाडी पंचायत के शहर अध्यक्ष रमेश शिंदे, शोभा शिंदे, महाराष्ट्र रिक्षा पंचायत के लक्ष्मण शेलार, रिक्षा ब्रिगेड के बाळासाहेब ढवले, दिनेश यादव, मुकेश ठाकूर, जयश्री श्रीधर मोरे, मालन गवई, रंजीत शहा, सगुणा शिखरे, राणी तांगडे, सरस्वती गुजलोर, अशोक पासवान आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

बाबा कांबले ने कहा कि, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के पांच साल के चुनाव का बिगुल बज चुका है। इसके अलावा पुणे, मुंबई, पनवेल, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नासिक और सोलापुर में भी महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों (municipal elections) की घोषणा होने की उम्मीद है। नगर निगम क्षेत्र में और एक मेट्रो शहर के रूप में और बड़े शहरों में, असंगठित मजदूरों की संख्या कुल आबादी का 40 प्रतिशत है। इसके अनुसार पिंपरी-चिंचवड़ शहर में असंगठित मजदूरों जैसे रिक्शा चालक, टपारी, पथरी, ठेला, फल-सब्जी विक्रेता, निर्माण श्रमिक, घरेलू कामगार, सफाईकर्मी, महिला ठेका मजदूरों की संख्या 10 लाख से अधिक है। उन्हें कई सवालों का सामना करना पड़ता है। हम कष्टकरी कामगार पंचायत, महाराष्ट्र रिक्शा पंचायत, टपरी पथरी हाथगाड़ी पंचायत, कष्टकरी जनता आघाड़ी सहित विभिन्न संगठनों के माध्यम से उनके मुद्दों को लड़ रहे हैं।

 

बाबा कांबले ने आगे कहा कि शहर के पहले फेरीवाले, घरेलू कामगार कल्याण बोर्ड, निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड और गरीबों के लिए घरकुल का विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। बहुजन पिछड़े वर्ग की मेहनतकश जनता ने राजनीतिक नेताओं पर भरोसा किया और बड़ी संख्या में वोट डाला। बहुतों को सत्ता में रखा। उसके बाद मेहनतकशों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है, लेकिन उनके मसलों को हमेशा नजरअंदाज किया गया। राजनीतिक नेताओं के धोखे को देखते हुए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कड़ा रुख अख्तियार करने की जरूरत है। इसके लिए राजनीतिक भूमिका की आवश्यकता होती है।

 

 

 

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