Pune: पुणे में फर्जी पत्रकार की पोल खोल; इस तरह से हुआ पर्दाफाश, जानें पूरा मामला

पुणे: नाकाबंदी पर कार रोकने के बाद पिंपरी के फर्जी पत्रकार और उसके साथी ने हंगामा करते हुए सहायक निरीक्षक और उसके सहयोगियों के साथ धक्का मुक्की करने की कोशिश की। खडक परिसर में रविवार को यह घटना हुई।

इस मामले में श्रीराम अशोक सिंग परदेशी (उम्र 36) और जतीन कुंदन परदेशी (उम्र 21, नि. दोनो पिंपरी) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में सहायक निरीक्षक चंद्रकांत गोसावी ने खडक पुलिस थाने में शिकायत दी है।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता खडक पुलिस में नियुक्त है। वे फडगेट पुलिस चौकी में कार्यरत हैं। फडगेट चौक पर कोरोना की पृष्ठभूमि पर नाकाबंदी कर रहे थे। वहा पर उनकी मदद के लिए एसपीओ भी थे। इसी दौरान एक कार को रोका गया। उसमे क्षमता से अधिक लोग थे। इसलिए उनसे पूछताछ की गई। तभी एक ने एसपीओ से कहा कि वह पत्रकार है। इसलिए गोसावी को बुलाया गया। उसने कार्ड भी दिखाया और कहा कि अंतिम संस्कार के लिए जा रहे हैं।

इसलिए गोसावी ने उसे छोड़ दिया। लेकिन कार आगे ले जाकर खड़ी करने के बाद उसमे से एक उतरा और गिसावी से पूछा कि इस एसपीओ को कार रोकने का क्या अधिकार है। इसके बाद दोनों में विवाद शुरू हो गया। ऐसे में एक व्यक्ति वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगा। पुलिस उन लोगो को समझा रही थी तभी उसने चिल्लाना शुरू किया ‘ मैं पत्रकार हूँ, तुम मुझे नहीं रोक सकते हो, तुम किस तरह की कार्रवाई करते हो, मैं तुम्हारे खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई करूंगा।‘ पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गोसावी के साथ धक्का मुक्की करने की कोशिश की। उसके बाद पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी कि वो किस संस्था का पत्रकार है। जिससे पता चला कि उसके पास जो पहचान पत्र था वह फर्जी था। उसके बाद पुलिस ने सरकारी काम में रुकावट डालने के लिए मामला दर्ज किया। एक को हिरासत में लिया गया है। इस मामले की जांच खडक पुलिस कर रही है।

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