Pune Crime | तड़के तक बाहर से बंद, भीतर से शुरू था बार; पुलिस ने मारा छापा

पिंपरी : Pune Crime | कोरोना पाबंदियों के चलते 31 दिसंबर की सुबह तक होटल और बार को खोलने की इजाजत नहीं थी। हालांकि पिंपरी चिंचवड़ (Pimpri Chinchwad) में एक बार आधी रात के बाद भी दोपहर साढ़े तीन बजे तक बाहर बंद रहा और अंदर से शुरू रखा गया था। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस (Police) ने छापेमारी की। सिर्फ यही उम्मीद थी कि समय का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इसके बाद जो हुआ वो चौंकाने वाला (Pune Crime) था। इस बार का लाइसेंस एक नाम और एक जगह था, लेकिन यह दूसरे नाम से दूसरी जगह पर शुरू था।

 

इससे राज्य सरकार (State government) का जीएसटी टैक्स भी बर्बाद हो रहा था साथ ही उपभोक्ताओं को भी ठगा जा रहा था। नतीजतन पुलिस ने बार मालिक पर धोखाधड़ी का भी मामला दर्ज किया। यह धोखाधड़ी के साथ ही शराब बंदी अधिनियम, महाराष्ट्र कोविड अधिनियम 2020, संक्रामक रोग अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम सहित पांच कानूनों के तहत दायर किया गया था। इस बार पर वाकड संभाग के सहायक आयुक्त श्रीकांत दिसले (Assistant Commissioner Shrikant Disale) ने कार्रवाई की है। इसमें बार के प्रबंधक अनुराग सुभाष भिलारे (Anurag Subhash Bhilare) (निवासी शुक्रवार पेठ, पुणे) को गिरफ्तार (Arrest) कर लिया गया है। जबकि बार के मालिक चिराग संदीप थोरवे (Chirag Sandeep Thorve) (निवासी वाकड, पुणे) की खोजबीन शुरू है।

 

31 दिसंबर की पृष्ठभूमि पर वाकड क्षेत्र के जगताप डेयरी इलाके में रात्रि गश्त पर सहायक आयुक्त श्रीकांत दिसले थे। उन्हें पता चला कि समय सीमा के बावजूद प्रासंगिक द मैजेस्टिक लाउंज और बार अभी भी अंदर चल रहा था। उन्होंने जैसे ही बार में छापा (Raid) मारा तो पता चला कि बार बाहर से बंद था और अंदर से शुरू हुआ था।। इसके बाद उन्होंने वाकड पुलिस टीम (Wakad Police Team) को रात्रि गश्त पर बुलाया और संबंधित बार के खिलाफ कार्रवाई की। उस वक्त देखा गया कि अंदर कई लोग खाना खा रहे थे। वहां कोरोना के नियमों को रौंदा गया। इसलिए उसके खिलाफ तीन कानूनों के तहत कार्रवाई की गई। बार मालिक के बारे में आगे की जांच में पुलिस को मामले का खुलासा हुआ। जब पुलिस ने बार का लाइसेंस मांगा तो पता चला कि बार का लाइसेंस आदिनाथ गोपी लाउंज पिंपल नीलख के नाम पर था और उसे द मैजेस्टिक लाउंज और बार के नाम से चलाया जा रहा था। ग्राहकों को भी मैजेस्टिक के नाम से बिल भी दिए जा रहे थे। टैक्स चोरी में सरकार ही नहीं उपभोक्ताओं को भी ठगा जा रहा है।  यानी एक तरफ वे उपभोक्ताओं से जीएसटी टैक्स (gst tax) वसूल रहे थे। हालांकि, एकत्र किए गए कर का भुगतान करने का कोई सवाल ही नहीं था क्योंकि बिल अन्य बिना लाइसेंस वाले नामों को दिया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक वह अब तक लाखों रुपये की ठगी की चुकी है। बहरहाल मामले की जांच जारी है।

 

 

 

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