Pune Crime | पुणे में ढाई वर्ष की बच्ची के साथ रेप और हत्या करनेवाले दरिंदे को फांसी की सजा, 1 साल में मिला न्याय

पुणे : पुणे (Pune Crime) जिले के वेल्हे पुलिस थाने (Velha Police Station) की सीमा में एक ढाई साल की बच्ची का अपहरण (Kidnapped) कर उसके साथ बलात्कार (Rape) और फिर उसकी हत्या (Murder) करने की घटना 15 फरवरी 2021 को हुई (Pune Crime) थी। इस गुनाह के आरोपी को पुणे ग्रामीण पुलिस (Pune Rural Police) ने सिर्फ 48 घंटे में ही हथकड़ी पहनाई और अदालत (Court) में चार्जशीट (Charge Sheet) भी दायर कर दिया। आरोपी संजय बबन काटकर (Sanjay Baban Katkar) (उम्र 38 नि. कादवे, पानशेत, ता. वेल्हे, जि. पुणे) को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संजय ए देशमुख (Special Judge POCSO Act Sanjay A Deshmukh) ने सोमवार (28 फरवरी) को फांसी की सजा (Death Penalty) सुनाई है।

 

मिली जानकारी के अनुसार 15 फरवरी को पुणे (Pune) जिले के कुरण खुर्द गांव में घर के सामने खेल रही ढाई साल की बच्ची का अपहरण हो गया था। वेल्हे पुलिस थाने में इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छानबीन शुरू की। पुणे ग्रामीण पुलिस दल (Pune Rural Police Team) के कर्मचारी बच्ची को ढूंढने में लग गए। इस दौरान हवेली तालुके (Haveli Taluka) के मालखेड थोपटेवाडी रोड पर एक पुल के नीचे बच्ची का शव पुलिस को मिला। मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के साथ बलात्कार होने की जानकारी  (Pune Crime) सामने आई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को ढूंढने के लिए पुलिस टीम बनाई।

 

अपराधी को ढूंढने के लिए वेल्हे पुलिस थाने के प्रभारी व उनकी टीम ने सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage), रिक्शा चालक, दुकानदार व अन्य गवाहों से मिली जानकारी  के आधार पर आरोपी संजय काटकर को ढूंढना शुरू किया। आरोपी जिस जगह पर छिपा हुआ था, उस जगह पर मोबाइल नेटवर्क नहीं था और बहुत ही दुर्गम जगह पर जाकर पुलिस ने आरोपी को ढूंढ निकाला।

 

पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सबूत जमा करते समय एविडेंस (Evidence), डीएनए टेस्ट (DNA Test), मेडिकल ग्राउंड (Medical Ground) व अन्य सबूत जमा कर कोर्ट में उसके खिलाफ चार्जशीट दर्ज किया। इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में ले जाने की विनती पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिनव देशमुख (Superintendent of Police Dr. Abhinav Deshmukh) ने की थी। इसके अनुसार जिला व सत्र न्यायाधीश संजय ए. देशमुख के फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट में आरोपी को दोषी ठहराकर फांसी की सजा दी है।

 

इस मामले में सरकारी वकील के रूप में विलास पठारे (Vilas Pathare) ने कामकाज देखा। वहीं पुलिस नाईक प्रसाद मांडके (Police Naik Prasad Mandke) व सहायक पुलिस फौजदार विद्याधर निचित (Vidyadhar Nichit) ने कामकाज देखा। ट्रायल मॉनिटर सेल केस अधिकारी (Trial Monitor Cell Case Officer) के रूप में सहायक पुलिस निरीक्षक मनोज पवार (Assistant Police Inspector Manoj Pawar) ने कामकाज देखा। इस मामले को तेजी से छानबीन कर आरोपी को एक साल के अंदर सजा दिलाने के कारण पुलिस अधीक्षक टीम (Police Superintendent Team) को 35 हजार रुपये नकद इनाम देने की घोषणा की गई।

 

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिनव देशमुख (SP Dr. Abhinav Deshmukh), तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक विवेक पाटिल (Addl SP Vivek Patil), तत्कालीन उप विभागीय पुलिस अधिकारी सई भोरे पाटिल (SDPO Sai Bhore Patil),  तत्कालीन पुलिस निरीक्षक स्थानीय क्राइम ब्रांच पद्माकर घनवट  (Police Inspector Padmakar Ghanwat) के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक मनोज पवार, सहायक फौजदार एस.एस बांदल, आर.एस. गायकवाड, पुलिस हवलदार ए. एन. आडवाल, पुलिस नाईक ए.पी. शिंदे ए आर सालुंखे, एसआर ओमारे, वी. एस. मोरे, डी.ए जाधव की टीम ने छानबीन की।

 

 

 

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