Pune Corporation | महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर मनपा और सत्ताधारी उदासीन!  सेनेटरी  नैपकिन वेंडिंग मशीन का ‘स्मार्ट मैत्रीण’ प्रोजेक्ट एक साल से बंद

पुणे : मनपा (Pune Corporation) के स्वास्थ्य विभाग (Municipal Health Department) द्वारा सीएसआर (CSR) के तहत शुरू किए सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन (Sanitary Napkin Vending Machine) व इंसरीनेशल ‘स्मार्ट मैत्रीण’  अभियान (Smart Maitrin Campaign) एक साल में ही बंद हो गया है। इसलिए पिछले साल से करोड़ो सएनेटरी नैपकीन कचरा में फेंका गया है। एक ओर कचरा प्रबंधन (Waste Management) पर करोड़ो रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ऐसे में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर  प्रशासन और राजनीतिक पार्टियां उदासीन दिख रही (Pune Corporation) है।

 

मनपा (Pune Corporation) ने दिसंबर 2019 को एक्शन कमेटी अगेंस्ट अनफेयर मेडिकल प्रैक्टिस संस्था के साथ 5 साल के लिए करार किया था। इसके अंतर्गत शहर के कॉलेज स्कूल, होस्टल ऐसे सार्वजनिक जगहों पर सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाना साथ ही इस्तेमाल किए गए गए नैपकिन को इकट्ठा कर इंसरीनेशन प्लांट (Insertion Plant) में डिस्पोजल (Disposal) करने की योजना थी। संबंधित कंपनी ने सीएसआर के तहत इस परियोजना को चलाने की तैयारी की। इस दौरान घनकचरा विभाग ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगवाया था। इसमें पांच कंपनियों ने प्रस्ताव पेश किया था, इसमें से एक्शन कमेटी अगेंस्ट अनफेयर मेडिकल प्रैक्टिस कंपनी (Action Committee Against Unfair Medical Practice Company) को चुना गया था।

 

इस कंपनी ने 270 जगहों पर वेंडिंग मशीन लगाया था। साथ ही मनपा द्वारा पहले से लगाए गए 12 इंसरीनेशन प्लांट में इस्तेमाल किए गए नैपकिन का निपटारा किया जा रहा था। इन सब कामों के लिए कंपनी द्वारा 30 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। कुछ महीने तो इसे अच्छे से चलाया गया। वेंडिंग मशीन का इस्तेमाल छात्रा और महिलाओं ने अच्छे से किया। ऐसे में घन कचरा में नैपकिन के प्रमाण में भी कमी आई थी। स्वच्छ सर्वेक्षण प्रतियोगिता में पुणे (Pune) शहर का नामांकन सुधार में इसका उपयोग हुआ।

 

इस दौरान कोरोना शुरू होने के बाद स्कूल, कॉलेज भी बंद हो गए। इसका परिणाम इस परियोजना पर हुआ। सैनिटरी नैपकिन जमा करने या उस पर प्रक्रिया क्रने की दूसरी सक्षम व्यवस्था न होने से नैपकीन कचरा में जाने लगा। साधारण तरीके से एक साल से अधिक होने के बाद भी सैनिटरी नैपकिन पर प्रक्रिया करने का कोई विकल्प न होने के कारण इस बार स्वच्छ प्रतियोगिता में मनपा का स्तर भी गिरने की संभावना है।

 

शहर  में एक करोड़ से अधिक सैनिटरी नैपकीन कचरे में फेंके जाते हैं। एक सैनिटरी नैपकीन का निपटारा होने में 600 साल लगते हैं। इस पर सैनिटरी नैपकीन के कचरे की गंभीरता नजर आता है।

 

एक्शन कमेटी अगेंस्ट  अनफेयर मेडिकल प्रैक्टिस संस्था ने एक साल में ही इस परियोजना को बंद कर दिया। इस वजह से यह संस्था परेशानी में आ गई है। इस परियोजना पर काम करनेवाले कर्मचारियों का लगभग 20 लाख रुपये का वेतन भी अभी तक नहीं दिया गया है। इसलिए संस्था के साथ कर्मचारी भी परेशान हैं।

 

प्रॉक्टर एंड गैंबल अंतर्राष्ट्रीय कंपनी (Procter & Gamble International Company) ने सैनिटरी नैपकिन पर प्रक्रिया करने की तैयारी दिखाई है। शुरुआत के तीन साल यह कंपनी खुद के खर्च पर इस प्रोजेक्ट को चलाएगी। रामटेकडी (Ramtekdi) स्थित कचरा प्रक्रिया की जगह पर इस परियोजना को शुरू करने के लिए हाल ही में सर्वसाधारण सभा ने मंजूरी दी है।

 

 

 

 

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