Pune Corporation Election | आगामी पुणे मनपा चुनाव में ‘महाविकास’ एक साथ और मनसे के भी भाजपा-रिपाई के साथ गठबंधन करने की संभावना बढ़ी ; एमआईएम और आम आदमी पार्टी मुश्किल में 

पुणे, 23 सितंबर : Pune Corporation Election | तीन सदस्यीय प्रभाग पद्धति  की वजह से आगामी पुणे मनपा चुनाव (Pune Corporation Election) में महाविकास आघाडी (Maha Vikas Aghadi) एक साथ जबकि मनसे (MNS) के भी भाजपा-रिपाई (BJP-RPI) के साथ गठबंधन करने की संभावना  बढ़ गई है।  ऐसे में पिछले चुनाव में खाता खोलने वाली एमआईएम (MIM) और इस बार खाता खोलने के  प्रयास में जुटी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है।

राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में आगामी मनपा चुनाव (Pune Corporation Election) के लिए एक सदस्यीय पद्धति से वार्ड रचना करने का आदेश दिया था।  इस आदेश के बावजूद शिवसेना (shivsena) , राष्ट्रवादी (NCP) और कांग्रेस (congress) महा गठबंधन सरकार से प्रमुख मनपा की सत्ता हासिल करने के लिए बहुसदस्यीय प्रभाग रचना किये जाने की उम्मीद की जा रही  थी।  पुणे और पिंपरी चिंचवड मनपा में फिर से सत्ता स्थापित करने के लिए प्रयासरत नज़र आ रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार (ajit pawar) दो सदस्यीय प्रभाग के लिए प्रयासरत थे।  राजनीतिक हलकों में विश्वास था कि वह अपनी राजनीतिक ताकत दिखाते हुए ऐसा कर पाएंगे।  इसकी वजह से पुणे  में शिवसेना, मनसे सहित राष्ट्रवादी कांग्रेस, एमआईएम, आम आदमी पार्टी दवारा चुनाव के लिए जोरदार लामबंदी शुरू की गई।
बीच के  दिनों में मंत्रिमंडल की बैठक में तीन सदस्यीय प्रभाग रचना मंजूर की गई।  इससे आघाडी और गठबंधन की तस्वीर बदलने की बात स्पष्ट हो गई है।  तीन सदस्यीय रचना की वजह से पुणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस, कांग्रेस और शिवसेना महाविकास आघाडी के एक साथ चुनाव लड़ने की संभावना अधिक बढ़ गई है।  उपनगर में इसका सबसे अधिक लाभ राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना को होगा।  प्रमुख रूप से येरवड़ा, वडगाव शेरी, कोंढवा, हड़पसर, शिवाजीनगर, बिबवेवाड़ी, आंबेगांव, सिंहगढ़ रोड, रास्ता पेठ परिसर में जहां भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी वहां आघाडी के जरिये जीत दर्ज करने का प्रयास किया जाएगा।  जबकि शहर के मुख्य क्षेत्र के पूर्वी भाग, पर्वती निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस को आघाडी की वजह से अच्छी सफलता मिलने की संभावना महाविकास आघाडी दवारा व्यक्त की जा रही है।
मनसे दवारा  पिछले साल भर से हिंदुत्व का एजेंडा आगे बढाए जाने की वजह से उसकी भाजपा से नजदीकी बढ़ गई है। शहर में अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन की स्थानीय कार्यकर्ताओं की इच्छा किसी से छिपी नहीं है।  तीन सदस्यीय प्रभाग समिति की वजह से भाजपा के साथ जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।  यह मानसिकता अधिक प्रबल हो गई है। मनसे की  कोथरुड, कसबा और कात्रज परिसर के कुछ ताकत है।  इसका फायदा निश्चित रूप से मनसे के साथ भाजपा को होगा।  लेकिन कोथरुड और कसबा में भाजपा नगरसेवक और दूसरी तरफ अपने खास  कार्यकर्ता के होते मनसे को सीट वितरण में  मौका मिलेगा ?  यह बड़ा सवाल है।  इसके साथ ही मुंढवा, येरवड़ा और बोपोडी जैसी जगहों पर भाजपा और रिपाई के गठबंधन की इच्छा के कारण मनसे को दी गई सीट में  कितनी में जीत मिलेगी  ? इसे लेकर भी दिक्कत पैदा होगी।  ऐसे में मनसे का भाजपा के साथ गठबंधन में कुछ अड़चनें होने की संभावना है।
दूसरी तरफ पिछले मनपा चुनाव में येरवड़ा से जीत दर्ज करने वाली एमआईएम ने सत्ता में भाजपा को समर्थन दिया है।  लेकिन एमआईएम की एकमात्र नगरसेविका  वाली पार्टी से ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ सकता है।  केवल चुनाव के वक़्त कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाना ही उपयोगिता है।  इसके साथ ही  दिल्ली और उत्तर के कई राज्यों में अरविंद केजरीवाल के प्रभाव की वजह से आम आदमी पार्टी पिछले चुनाव से पुणे में अस्तित्व दिखाने की शुरुआत की है।
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