पतंजलि ग्रुप डूबने की कगार पर पंहुचा : बिक्री में हुई कमी, उत्पादन पर भी पड़ा असर

हरिद्वार : समाचार ऑनलाईन – बड़ी बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को चुनौती देते हुए उधोग क्षेत्र में उतरी रामदेव बाबा की पतंजलि समूह ने बेहद कम समय में बड़ी जगह बना ली है । तीन वर्षों में पतंजलि ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टक्कर देते हुए अपना ब्रांड को स्थापित कर दिया है । लेकिन योजनाओं की गलती, देश भर में बिना योजना के खोले गए आउटलेट्स, बिक्री में हुई भरी कमी के कारण पतंजलि का साम्राज्य चरमराने लगा है ।

पतंजलि प्रसिद्ध हो चुकी है 
अपनी योग विद्या के आधार पर रामदेव बाबा ने देशभर के लोगों में आकर्षण पैदा किया। उनकी पुरे देश में भारतीय कंपनी के रूप में पतंजलि प्रसिद्ध हो चुकी है । पतंजलि की तरफ से बहुराष्ट्रीय कंपनी के सामान खरीदने के बजाय पतंजलि के सामान खरीद कर विदेश जाने वाले पैसों को रोकने का प्रचार किया। अच्छे उत्पादन और स्वदेशी रंग के अलावा रामदेव बाबा की अपील के कारण पतंजलि ने बेहद कम समय में काफी अच्छा बिज़नेस किया। 2016-2017 में पतंजलि का उत्पादन लोकप्रियता के शिखर को छू लिया था ।

बाबा रामदेव ने कही थी बड़ी बात 

पतंजलि के टर्नओवर को देखकर विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का माथा घूम जाने की बात बाबा रामदेव ने कही थी । मार्च 2018 में कंपनी की बिक्री 200 अरब रुपए तक पहुंच गई थी । लेकिन फ़िलहाल बिक्री में 10% की कमी के साथ 81 अरब रुपए तक पहुंच गया है । अगले वर्ष बिक्री में और कमी आने की संभावना जताई जा रही है।  कंपनी के सूत्रों ने बताया कि 31 दिसंबर तक पहले 9 महीने में बिक्री 47 अरब थी ।   कंपनी दवारा उठाये गए कुछ गलत कदम की वजह से नुकसान की बात कही जा रही है ।

उत्पादन की गुणवत्ता पर इसका असर पड़ा 

पतंजलि का विस्तार तेज़ी से होने के बाद कंपनी अन्य उत्पादों से उत्पाद तैयार करने लगी । इसके कारण कई उत्पादन की गुणवत्ता पर इसका असर पड़ा । ट्रांसपोर्टेशन के लिए कंपनी दवारा दीर्घकालीन करार नहीं किये जाने की वजह से कंपनी की योजना गड़बड़ा गई । खर्च बढ़ गया । कंपनी के पास बिक्री की देखरेख करने के लिए जरुरी सॉफ्टवेयर नहीं है।  इससे वितरण व्यवस्था भी गड़बड़ा गई ।
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