Osho Ashram case | ओशो आश्रम मामले में केंद्र का हस्तक्षेप चाहिए

पुणे : (Osho Ashram case) कोरेगांव पार्क (Koregaon Park) स्थित प्रसिद्ध ओशो आश्रम को तबाह करने की साजिश की जा रही है। इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच होनी चाहिए। इसी तरह, ओशो आश्रम (Osho Ashram case) के विश्वस्त द्वारा लगभग 1800 करोड़ रुपये के लेनदेन में गड़बड़ी करने का आरोप गीतकार व ओशो फॉरएवर (Osho Forever) के प्रवक्ता स्वामी गोपालभारती (Spokesperson Swami Gopalbharti) और ओशो तपस्वी सन्यासी स्वामी जोरबा ने एक संवाददाता सम्मेलन में की। उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार आश्रम के संचालक मंडल को बर्खास्त करे।

 

 

स्वामी जोरबा ने कहा, “ओशो (रजनीश) भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं और उन्होंने विभिन्न देशों में वेदों और उपनिषदों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया है। दुनिया भर में उनके लाखों अनुयायी हैं और वे पुणे में ओशो के आश्रम में आते हैं। हालांकि यहाँ के आश्रम को कोरोना काल में नुकसान होने की बात कह कर आश्रम की कुछ जमीन उद्योगपतियों को बेचने की कोशिश की जा रही है। इसलिए ओशो प्रेमी ओशो आश्रम के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

 

ओशो की दुर्लभ तस्वीरें, हीरे और महत्वपूर्ण दस्तावेज अमेरिका ले गए हैं। उनका कॉपीराइट और ट्रेडमार्क स्विट्जरलैंड से प्राप्त करना पड़ रहा है। ओशो को सद्गुरु मानने के बजाय उन्हें जानबूझकर सिर्फ एक लेखक के रूप में पेश किया जा रहा है। ओशो फाउंडेशन इंटरनेशनल व नवसन्यास (रजनीश) फाउंडेशन ट्रस्ट ने आश्रम में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है, उसकी सीबीआई जांच की जाए, यह मांग ओशो प्रेमी ओमप्रकाश पांडे ने की है।

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