Nirbhaya Gangrape Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने अलग-अलग फांसी देने की मांग ख़ारिज की, दोषियों को  क़ानूनी दावपेंच के लिए दिए 7 दिन

नई दिल्ली: समाचार ऑनलाइन- निर्भया गैंगरेप और हत्या के दोषी फांसी की सजा से बचने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं. नतीजतन उनकी सजा की तारीख लगातार आगे बढ़ते जा रही है. लेकिन आज दिल्ली हाईकोर्ट ने इस केस की दूसरी बार भी फांसी टाले जाने के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा दायर की गई याचिका पर अपना फैसला दे दिया है.

HC ने निर्भया केस के दरिंदों को अलग-अलग फांसी देने की मांग को सिरे से नकार दिया है. अर्थात अब सभी आरोपियों को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा. साथ ही कोर्ट ने दोषियों को क़ानूनी हथकंडे अपनाने के लिए 7 दिन की मोहलत दी है. इसके अलावा निचली अदालत (पटियाला हाउस कोर्ट) का फांसी टालने का फैसला भी रद्द करने से इंकार कर दिया है.

HC ने अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि दोषियों ने जो कृत्य किया है वो बेहद अमानवीय था. साथ ही कहा है कि दोषियों और उनके वकीलों ने बेवजह इस मामले को लंबा खींचा है.

बता दें कि न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने उक्त मामले में विशेष सुनवाई कर 2 फरवरी को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था.

आप की जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा द्वारा निचली अदालत के 31 जनवरी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें चरों आरोपियों की फांसी पर ”अगले आदेश तक” रोक लगा दी थी. निर्भय के चारों दोषी मुकेश कुमार सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय कुमार शर्मा (26) और अक्षय कुमार (31) फ़िलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखे गए हैं.

वहीं, निर्भया के माता-पिता ने दिल्ली उच्च न्यायालय से केंद्र की याचिका पर जल्द से जल्द फैसला देने की अपील की, जिसमें दोषियों की फांसी पर रोक को चुनौती दी गयी है.

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