गुरुमुख सुखवानी और घनश्याम अग्रवाल बिल्डर समेत 27 लोगों के खिलाफ एट्रोसिटी के तहत मामला दर्ज

महार वतन की जमीन हड़पने का प्रकरण

पिंपरी : पुणेसमाचार ऑनलाइन –महार वतन की जमीन हड़पने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की फटकार के बाद हरकत में आयी पिंपरी चिंचवड़ पुलिस ने मशहूर दो बिल्डरों समेत 27 लोगों के खिलाफ पांच माह बाद क्यों न हो मामला दर्ज कर लिया। गुरुमुख सुखवानी और घनश्याम अग्रवाल नामक बिल्डर और उनके साथियों के खिलाफ देहूरोड पुलिस ने भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की 6 और एससी- एसटी एक्ट की चार धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ सागर अंकुश जाधव निवासी जाधवनगर, रावेत, पुणे ने शिकायत दर्ज कराई है।

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रावेत के सर्वे नं 72/73 में सागर जाधव के पुरखों की महार वतन की जमीन है, जहां वे खेती- बाड़ी कर अपने परिवार का गुजारा करते है। इस जमीन पर बिल्डर सुखवानी और अग्रवाल की नजर है। वे लगातार पुलिस और गुंडों की मदद से यह जमीन हड़पने की कोशिशों में हैं। पुलिस ने जाधव की दरकार नहीं सुनी, जिसके चलते उन्होंने राष्ट्रीय अनुसुचित जाति आयोग के पास 2013 में शिकायत दर्ज कराई। यह मामला न्याय प्रविष्ट है, इसके बावजूद इस साल 2 मार्च को बिल्डर के गुंडों ने उनकी जमीन में प्रवश कर उनकी झोपडी को तोडकर सारा सामान फेंक दिया। जमीन व खेती की रखवाली कर रहे वॉचमैन को मारपीट कर भगाया गया। जब सागर जाधव इसकी शिकायत लेकर देहूरोड पुलिस थाने गए तो वहां उनकी शिकायत लेने से मना कर दिया।

नतीजन जाधव ने राष्ट्रीय अनुसुचित जाति आयोग को 6 मई को एक पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए पुणे के जिलाधिकारी और पिंपरी चिंचवड पुलिस आयुक्त को इस मामले की पूरी रिपोर्ट के साथ 12 जून को दिल्ली में आयोग के सामने पेश होने की नोटीस जारी की थी। इस सुनवाई में पुलिस आयुक्त के बजाय उनके प्रतिनिधि के तौर पर उपायुक्त विनायक ढाकणे और जिलाधिकारी की ओर से नायब तहसीलदार विकी परदेशी उपस्थित हुए। इस पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई और उन्हें फटकारते हुए इस मामले में अगली सुनवाई में राज्य के पुलिस महानिदेशक और पुणे के जिलाधिकारी को उपस्थित रहने के आदेश जारी किए। इसके बाद देहूरोड पुलिस ने बिल्डर सुखवानी व अग्रवाल समेत 27 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 504, 506, 427, 143, 149 और एससी- एसटी एक्ट (अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार प्रतिबंध कानून) की धारा 6, 3(1)आर, 3(1) एस और 3(1) वीए के तहत मामला दर्ज किया है।

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