मोदी सरकार ने लिया ‘यह’ बड़ा निर्णय! स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने किया इसका स्वागत

मुंबई : जैसे-जैसे राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे मरीजों के इलाज के लिए जरूरी यानी कि रेमडेसिवीर की कमी हो रही है। इसलिए मरीज के परिजनों को इंजेक्शन के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है। साथ ही इंजेक्शन का काला बाजार भी शुरू हो गया है और पुलिस ने इसके खिलाफ कार्रवाई भी की है। इस पृष्ठभूमि पर, केंद्र सरकार ने रेमडेसिवीर इंजेक्शन के निर्यात को रोकने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने किया है।

केंद्र सरकार द्वारा रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कमी के कारण इसके निर्यात को रोकने का निर्णय लिया गया है जो स्वागत योग्य है। इसलिए अब जरूरतमंद मरीजो को रेमडेसिवीर इंजेक्शन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, यह विश्वास राजेश टोपे ने जताया है। राजेश टोपे ने महाराष्ट्र में रेमडेसिवीर की कमी को देखते हुए इन इंजेक्शनों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की थी।

राजेश टोपे ने दो ट्वीट किए। दूसरे ट्वीट में  उन्होंने कहा है कि कुछ दिन पहले, रेमडेसिवीर उत्पादकों की एक बैठक आयोजित की गई थी। उस समय  निर्यात को रोकने के मुद्दे पर चर्चा की गई थी। अब केंद्र सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगाने का निर्णय लिया है तो मरीज के रिश्तेदारों को राहत मिली है।

राज्य के 120 टीकाकरण केंद्रों में से 70 बंद पड़े हैं

राज्य में वैक्सीनेशन की कमी पर बोलते हुए राजेश टोपे ने कहा कि महाराष्ट्र में देश में सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन हुए हैं। महाराष्ट्र में टीकाकरण की रफ्तार सबसे अधिक है। इसलिए, हर महीने 1 करोड़ 60 लाख वैक्सीन की आवश्यकता होती है,  लेकिन सिर्फ 1 करोड़ 04 लाख वैक्सीन की आपूर्ति की गई है। वर्तमान में राज्य में 120 केंद्र हैं जिनमें से 70 केंद्र पर वैक्सीन न होने के कारण बंद पड़े हैं। राज्य में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए टीकाकरण केंद्र बढाए गए हैं। कई सुविधाओं के बावजूद लोगों को वैक्सीन लगाना संभव नहीं हो रहा है, ऐसा  टोपे ने कहा।

इसकी तुलना में महाराष्ट्र को वैक्सीन मिलनी चाहिए

कहा जाता है कि केंद्र सरकार ने सबसे ज्यादा वैक्सीन महाराष्ट्र को दिए हैं। हालांकि,  ऐसा होने के बाद भी वैक्सीन की कमी की शिकायतें आ रही हैं। इस पर बोलते हुए टोपे ने कहा कि महाराष्ट्र की तुलना राजस्थान या गुजरात से नहीं की जा सकती। जनसंख्या व क्षेत्रफल की दृष्टि से महाराष्ट्र की तुलना छोटे राज्यों से नहीं की जा सकती। इसका कारण ये है कि महाराष्ट्र में कोरोना मामलों की संख्या सबसे अधिक है। हालांकि, ऐसे समय में जब देश में कुल मरीजों की संख्या में से 60  प्रतिशत महाराष्ट्र में हैं, तो महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा वैक्सीन मिलने चाहिए।

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