पौधे लगाकर दे रहे पर्यावरण संरक्षण का संदेश  

पुणे समाचार: गुणवंती परस्ते
प्रकृति ने हमारे लिए इतना कुछ किया है, अब हमारा फर्ज है उसके लिए कुछ करने का। इस सोच के साथ पुणे निवासी अजय केशवराव पाटिल अब तक सैंकड़ों पौधे लगा चुके हैं। पाटिल कहते हैं कि यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना होगा। आज विकास के नाम पर अंधाधुन पेड़ काटे जा रहे हैं, हम अगर इसे नहीं रोक सकते तो कम से कम पौधे लगाकर कुछ हद तक उसकी भरपाई तो कर ही सकते हैं। पाटिल पिछले 5 सालों से वृक्षारोपण कर रहे हैं और उनके संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।

कैसे हुई शुरुआत
पाटिल बताते हैं कि 10 साल पहले तक उनके गांव (मालेगांव) में खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता था, लेकिन पेड़ों की कटाई और सूखती जमीन के चलते कुओं का जलस्तर धीरे धीरे कम होने लगा। स्थिति ये हो चली थी कि जनवरी में भी कुएं सूख जाते थे। एक शोध के माध्यम से हमें यह पता चला कि घटते जल स्तर की वजह पेड़ों की संख्या में होती कमी है। तब मैंने ठान लिया था कि अपने आसपास इलाके में जितना संभव होगा पौधे लगाऊंगा। उस वक़्त लिया गया प्रण आज भी कायम है।

नुकसान की करते हैं भरपाई
सॉफ्टवेयर इंजीनियर पाटिल पिंपले गुरव स्थित एक सोसाइटी के चेयरमैन भी हैं। इसके अलावा उनकी एक आरवी एंटरप्राइजेस नामक कंपनी भी है,जिसके माध्यम से वह पर्यावरण के संबंध में लोगों को जागरुक करने का काम करते हैं। पाटिल के मुताबिक, अब तक वह सैंकड़ों पौधे लगा चुके हैं। सड़क निर्माण और हाईवे चौड़ीकरण के दौरान जो पेड़ काटे जाते हैं, उससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी कम काम करते हैं। हमारा प्रयास यही रहता है कि जितना संभव हो सके पेड़ों का संरक्षण किया जाए, ताकि हमारे आसपास हरियाली कायम रहे।

पानी बचाने पर भी जोर
अजय पाटिल ट्रैफिक सेफ्टी को भी अपनी ज़िम्मेदारी मानकर इस दिशा में काम कर रहे हैं। वो कहते हैं, प्रकृति और समाज के प्रति हमारी जो जिम्मेदारियां हैं, उन्हें हमें निभाने में संकोच नहीं करना चाहिए। हम जगह-जगह बोर्ड या बैनर आदि लगाकर लोगों से पेड़ों को नुकसान न पहुंचाने की अपील भी करते हैं। बतौर सोसाइटी चेयरमैन मैं पानी बचाने पर भी जोर देता हूँ, हम नियमित तौर पर बैठक में इस विषय पर चर्चा भी करते हैं। आप अगर आकर देखेंगे तो पाएंगे कि हमारी सोसाइटी कितनी हरीभरी है।

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