महाराष्ट्र : राज्य के फार्मासिस्ट को कोविड योद्धा के रूप में वेक्सीनेशन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाए 

 

पुणे, 27 मई : राज्य में कोरोना वायरस ने अपना कहर जारी रखा है।  कोरोना के प्रादुर्भाव को कम करने के लिए राज्य में वेक्सीनेशन मुहिम शुरू की गई है।  वेक्सीनेशन मुहिम के तहत मेडिकल, पैरामेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों को कोविड योद्धा के रूप में केंद्र और राज्य सरकार ने मान्यता दी है।  साथ ही उन्हें वेक्सीनेशन प्राथमिकता दी गई।  लेकिन दवा विभाग में सेवा देने वालों को इससे अलग रखा गया है।  दवा विभाग में काम करने वाले फार्मासिस्ट को कोविड योद्धा के रूप में वेक्सीनेशन प्रक्रिया में प्राथमिकता देने की मांग भारती विद्यापीठ इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मेसी एसोसिएशन, पूर्व छात्र संगठन के अध्यक्ष प्रसन्न पाटिल ने की है।

इससे जुड़े मांग की प्रति उपमुख्यमंत्री अजीत पवार स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, राज्य के अन्न व औषध प्रशासन मंत्री शिंगणे को भेजा है।  ज्ञापन में कहा गया है कि दवा विभाग में सेवा देने वालेर फार्मासिस्ट को केंद्र और राज्य सरकार ने कोविड योद्धा से बाहर रखा है।  ऐसे में 9 लाख दवा व्यवसायी व सेवा देने वाले वेक्सीनेशन प्रक्रिया की प्राथमिकता से वंचित है।  यह सभी फार्मसिस्ट पर अन्यायकारक और घोर निराशाजनक है।

पिछले एक वर्ष से फार्मासिस्ट भी कोरोना नियंत्रण के लिए काम कर रहे है।  इनमे प्रमुख रूप से दवा बनाने वाले, दवा विक्रेता, दवा का वितरण, दवा को लेकर परामर्श देने वाले आदि दिन रात सेवा दे रहे है।  साथ ही जरूरतमंदों को मुफ्त दवाइयां, सैनिटाइज़र व मास्क का वितरण, हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड की उपलब्धता की जानकारी, ब्लड की सप्लाई, प्लाज़्मा दान, ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए काम करते आ रहे है।  दुर्भाग्य से 200 से अधिक लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है. जबकि दो हज़ार से अधिक फार्मासिस्ट परिवार कोरोना संक्रमित है।  राज्य के फार्मासिस्ट मानसिक रूप से परेशान है।

इसलिए राज्य के फार्मासिस्ट को कोविड योद्धा के रूप में मान्यता देकर वेक्सीनेशन की प्रक्रिया में तत्काल प्राथमिकता दी जाए।
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