पिछले साल राहुल गांधी ने किया था लॉकडाउन का विरोध, अब कह रहे हैं-यही एकमात्र उपाय

ऑनलाइन टीम .नई दिल्ली : पिछले साल जब केंद्र सरकार ने देशभर में संपूर्ण लॉकडाउन लगाया था। तब राहुल गांधी ने इसका विरोध किया था।  उनका तर्क था कि लॉकडाउन कोरोना की स्पीड रोकता है। उसे खत्म नहीं करता है। अभी 20 दिन पहले भी राहुल ने लॉकडाउन को तुगलकी कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार के इस निर्णय के कारण देश के गरीबों पर बुरा प्रभाव पड़ा था। वे कई मौकों पर यह भी कह चुके हैं कि लॉकडाउन से वायरस को नहीं हराया जा सकता है।

राहुल गांधी वैक्सीनेशन की स्थिति और संक्रमण को नहीं संभालने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर लगातार निशाना साधते रहे हैं। सोमवार को भी एक ट्वीट में उन्होंने वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतिगत पंगुता से वायरस के खिलाफ जंग नहीं जीती जा सकती। अब देश में कोरोना के कहर को देखते हुए उन्होंने कहा है कि  देश में कम्पलीट लॉकडाउन ही एकमात्र उपाय है। हालांकि इस क्रम में उन्होंने केंद्र को कटघरे में खड़ा भी किया।

राहुल ने बुधवार को ट्वीट किया- मैं साफ कर देना चाहता हूं कि लॉकडाउन ही अब विकल्प बचता है, क्योंकि केंद्र सरकार के पास कोई रणनीति नहीं है। उन्होंने वायरस को ऐसी स्टेज तक पहुंचने में मदद की, जहां से उसे रोकने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
गौरतलब है कि देश इस समय कोरोना की दूसरी काफी खतरनाक लहर का सामना कर रहा है। लगभग दो सप्ताह से देश में हर दिन तीन लाख से ज्यादा कोरोना के केस आ रहे हैं।  हर रोज साढ़े तीन हजार से ज्यादा मौतें हो रही हैं।

तीस लाख से ज्यादा तो एक्टिव केस हैं। इस स्थिति को देखते हुए देश के कई राज्य पहले ही कई पाबंदियां लगा चुके हैं। हरियाणा में संपूर्ण लॉकडाउन लग चुका है, महाराष्ट्र, दिल्ली, ओडिशा, यूपी में भी पाबंदियां जारी हैं।  कई राज्यों में वीकेंड लॉकडाउन, नाइट कर्फ्यू आदि उपायों जरिए संक्रमण रोकने की कोशिश की जा रही है।

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