लीवर खराब क्यों होते है,  जाने लक्षण, ऐसे करें आयुर्वेद से बचाव 

लीवर खराब क्यों होते है,  जाने लक्षण, ऐसे करें आयुर्वेद से बचाव
आज कल हर व्यक्ति को पेट से सम्बंधित कुछ न कुछ परेशानी लगी रहती है. यह परेशानी लीवर में गड़बड़ी की वजह से अधिक होती हैं. खान पान पर विशष ध्यान नहीं दे पाते हैं, जिसकी वजह से लीवर ख़राब हो जाता है. इसमें लीवर का फैटी होना, सूजन आ जाना और लीवर में इन्फेक्शन हो जाना शामिल है. यदि हमारा खाना ठीक प्रकार से नहीं पच रहा है या हमे पेट में किसी प्रकार की परेशानी आ रही हैं तो हमे समझ जाना चाहिए की ये लीवर की खराबी के लक्षण हैं. इसे अनदेखा करना घातक साबित हो सकता है. ज्यादातर लीवर की खराबी अधिक तेल मसाले वाला भोजन, ज्यादा शराब पीने या बाहर का खाना अधिक खाने की वजह से होता है. लीवर की खराबी के कई लक्षण हो सकते हैं. इसमें मुंह बदबू आना, आंखों के नीचे काले धब्बे पड़ना, पेट में हमेशा दर्द रहना, भोजन का सही ढंग से नहीं पचना, त्वचा पर सफ़ेद धब्बे पड़ना, पेशाब या मल गहरे रंग का होना इत्यादि लीवर की खराबी के सामान्य लक्षण हैं. लीवर की खराबी का हमें जांच के बाद ही पता चल सकता है.यदि पाचनतंत्र में खराबी हो या लीवर पर वसा जमा  हो या फिर वह बड़ा हो गया हो तो ऐसे में पानी भी नहीं हजम होगा. त्वचा पर सफ़ेद धब्बे पड़ने लगते हैं, जिससे “लीवर स्पॉट” भी कहा जाता है. अगर हमारा लीवर सही से कार्य नहीं कर रहा होता है तो बदबू भी आने लगती है, क्योंकी मुंह में अमोनिया ज्यादा रिसता है.

लीवर खराब की पहचान कैसे करे?
सूजन बढ़ना..
लिवर में कोई दिक्कत हो रही है ये इससे भी समझ आता है कि हाथ और पैर में सूजन बढ़ने लगती है. ये सूजन सिर्फ इसलिए नहीं बढ़ती क्योंकि लिवर एक दिन थोड़ा स्लो काम कर रहा है. बल्कि ये सूजन इसलिए भी होती है क्योंकि लिवर को रोज का काम करने में ज्यादा तकलीफ होती है.
पेट दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है..
लिवर पेट के ऊपरी हिस्से में होता है और अगर उस हिस्से में अक्सर दर्द होता रहता है तो ये लिवर की बीमारी के संकेत हैं. ये दर्द अक्सर हल्का होता है और लगातार होता रहता है. अगर तीखा दर्द हो रहा है और कभी-कभी होता है तो ये लिवर की बीमारी का संकेत नहीं है. जब पेट में हल्का दर्द शुरू हो जाए तो ये संकेत होता है कि लिवर टॉक्सिक हटाने की जगह इसका आदि हो गया है और खाना ठीक तरह से पच नहीं पा रहा.

  खुजली होना ..
ये सुनने में भले ही अजीब लगेगा, लेकिन है पूरी तरह से सच. लिवर की बीमारी के कारण शरीर में खुजली होना शुरू हो जाती है. स्किन पूरी तरह से आम दिखेगी, लेकिन कुछ जगहों पर अचानक खुजली शुरू हो जाएगी. हालांकि, ये कई अन्य बीमारियों के लिए भी है.
शरीर पर निशान होना ..
लिवर की समस्या वाले लोगों को आसानी से शरीर पर जगह जगह नील पड़ जाते हैं. अगर शरीर पर बार-बार नील पड़ रहे हैं और ये पता भी नहीं है कि क्यों ये हो रहा है तो यकीनन डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है. त्वचा पर खुजली होने से पड़ने वाले चकत्ते लीवर की खराबी की ओर इशारा करते हैं.त्वचा की सतह का नम बने रहना ज़रूरी होता है.लेकिन लीवर खराब होने की स्थिति में त्वचा की सतह पर पाए जाने वाले द्रव्य में कमी आने से स्किन मोटी, शुष्क हो जाती है और इस पर खुजली वाले चकत्ते पड़ जाते हैं.
वजन का बढ़ना..
कोई एक्सरसाइज कर रहा है, खाना भी ठीक खा रहा है और वजन बढ़ने का कोई ठोस कारण नहीं मिल रहा है तो जांच करवाना जरूरी है. पहला शक तो इसके लिए थायरॉइड पर जाएगा अगर वो भी नहीं है तो यकीनन लिवर की कोई समस्या हो रही है. ऐसा अक्सर तब होता है जब इंसान काफी ज्यादा शक्कर, फैटी खाना या शराब पिए या फिर कोई ऐसी दवाइयां खा रहा हो जो लिवर पर सीधा असर करे.
 पीलापन..
नाखून और आंखों के पीला होना इस बात का इशारा होता है कि पीलिया हो रहा है और लिवर काफी खराब स्थिती में पहुंच गया है. आँखों का रंग पीला हो जाए और त्वचा सफ़ेद होने लगे तो ये संकेत है खून में पित्त वर्णक बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने के. जिसके कारण शरीर से अनावश्यक पदार्थों का बाहर निकलना संभव नहीं हो पाता और लीवर खराब होने का ये संकेत पीलिया के रूप में दिखाई देता है.
अधिक थकान लगना ..
  सामान्य रूप से रोज़ाना थोड़ी थकान महसूस होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर बहुत ज़्यादा थकान महसूस होने लगे, चक्कर आने लगे और मांसपेशियों में कमज़ोरी महसूस हो तो ये लीवर के पूरी तरह खराब होने के संकेत हैं.
आलस और थकान वैसे तो किसी भी इंसान के लिए खतरनाक है, लेकिन अगर बात करें लिवर की बीमारी की तो इंसान का एकदम से थकना शुरू हो जाता है. हल्की हरारत भी लगती है और हर समय थका हुआ सा महसूस होता है.
पेट पर सूजन आना 
पेट पर सूजन आने से पेट बाहर की ओर निकल जाना लीवर सिरोसिस रोग का संकेत है। जिसमें पेट में फ्लूड जमा हो जाता है और आँतों से रक्तस्राव होने लगता है। इसके बढ़ते जाने की स्थिति में लीवर कैंसर भी हो सकता है।
वजन कम होना 
 बिना प्रयास किये तेज़ी से वजन कम होता जाना अच्छा संकेत नहीं होता है. अगर लीवर खराब हो चुका हो तो भूख कम लगने लगती है। जिसकी वजह से वजन कम होता जाता है. इस संकेत को तुरंत जानकर इलाज करवाना बेहद ज़रूरी है.
मल में होने वाले परिवर्तन 
लीवर खराब होने की स्थिति में कब्ज़ की शिकायत रहने लगती है. मल में खून आने लगता है और मल का रंग काले रंग का हो जाता है। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ न करे.
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए स्वामी परमानन्द प्राकृतिक चिकित्सालय के प्रवक्ता डॉ सुबोध भटनागर कुछ आयुर्वेदिक उपायों के बारे में बताते हैं.
एक गिलास पानी में एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर और शहद मिला कर दिन में दो से तीन बार लें यह शरीर में मौजूद विषैले चीजों को निकालने में मदद करता है.

आंवला विटामिन सी का सबसे अच्छा स्रोत है. यह लीवर को कार्यशील बनाने में मदद करता है. स्वस्थ लीवर के लिए दिन में 4-5 आंवलें का सेवन ज़रूर करें.

पपीता पेट से सम्बंधित सभी रोगों क लिए एक रामबाण औषधि है. प्रतिदिन दो चम्मच पपीते के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलकर पीयें. इससे पेट सम्बंधित कई परेशानियों से निजात मिलता है.
कच्चे पपीते का थोड़ा-सा रस लेकर उसमें थोड़ी-सी चीनी मिलाकर लेना चाहिए . पके पपीते का थोड़ा-सा रस रोजाना पिलाने से भी लाभ होगा.
दूध में तुलसी के पत्तों का रस (10-15 बूंदें) मिलाकर रोज पिलाएं। पीपल का चूर्ण शहद के साथ रोजाना दिन में दो बार चटाने से भी लाभ होगा.
करेले का थोड़ा-सा रस लेकर उसमें शहद मिलाकर रोजाना पिलाएं। सब्जियों में करेला, बैगन, मूली, नीबू, लहसुन, लौकी, धनिया, गाजर, ब्रोकली, बथुआ का साग का सेवन करें.
शुद्ध गन्ने का रस और कच्चे नारियल का पानी सुबह-शाम पिएं। इस बीमारी में छाछ भी पियें और ग्रीन टी का भी सेवन करें.

हाई फाइबर वाले फल सब्जियां जैसे फलियां और साबुत अनाज अपने भोजन में शामिल करें.
नाश्ते में : 
खिचड़ी, दलिया और उबली हुई सब्जी लें.
दोपहर के खाने में: छिलके सहित आटे की दो रोटी, दो कटोरी उबली हुई सब्जी, एक छोटी कटोरी कटा हुआ पपीता और एक गिलास छाछ लें। शाम को चार बजे पपीता और अन्य कोई फल लें.
रात के खाने में : मोटे दरदरे आटे की 1 रोटी, 1 कटोरी दलिया और सब्जियों से बना सूप लें.सोने से एक घंटा पहले बिना चीनी वाला उबला हुआ 1 कप दूध पिएं. रात को सोने से पहले दूध में हल्दी मिला कर पीयें. हल्दी में रोग निरोधक क्षमता होती है. यह हैपेटाइटिस बी व सी के कारण होने वाले वायरस को बढ़ने से रोकता है.
इसके अलावा फलों में पपीता, तरबूज, सेब, अनार, आंवला, नारियल खाएं.
लीवर के रोगों में पालक और चकुंदर का जूस भी लाभकारी है.
एक गिलास गाजर के जूस में 20 मिलीलीटर आंवले का जूस लेकर मिला लें और इसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिला कर पियें | ताकत के लिए अखरोट का सेवन करें, सूरज मुखी के बीज, ओलिव आयल को  शामिल करे.
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