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ये पॉवर की बात है…कंप्यूटर बाबा जेल से रिहा, लेकिन साधी चुप्पी  

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इंदौर. ऑनलाइन टीम : इंदौर के जेल में दस दिन बिताने के बाद नामदेव दास त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा गुरुवार की रात को जमानत पर रिहा हो गए। जेल से बाहर निकलने के बाद संवाददाताओं ने उनसे कई सवाल किए, मगर उन्होंने सिर्फ यही कहा कि सत्य की जीत हुई है।

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बता दें कि राज्य में जब कांग्रेस की कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार थी तो कंप्यूटर बाबा को कैबिनेट मंत्री का दर्जा था। कांग्रेस के तत्कालीन 22 विधायकों द्वारा विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ भाजपा का दामन थाम लेने से सरकार गिर गई। उसके बाद भाजपा सत्ता में आई। राज्य में 28 स्थानों पर उप-चुनाव की स्थिति बनी तो कंप्यूटर बाबा ने लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकाली थी और सभी क्षेत्रों में जाकर भाजपा के उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार किया था।

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साथ ही भाजपा पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे। मतदान की तारीख के बाद कंप्यूटर बाबा के खिलाफ मामले दर्ज होने का सिलसिला शुरू हुआ और 9 नवंबर को उन्हें गिरफ्तार कर उनके आश्रम को जमींदोज कर दिया गया। ये आश्रम शहर के बाहरी इलाके में कथित तौर पर चरागाह भूमि का अतिक्रमण करके बनाया गया था। कंप्यूटर बाबा और छह अन्य लोगों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। आश्रम से एक राइफल, एक एयरगन और एक कृपाण भी बरामद की गई थी। पुलिस को ऑपरेशन के दौरान बेनामी संपत्ति के कागजात भी मिले थे।  उनके कुछ बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज की जांच भी की जा रही है।

कम्प्यूटर बाबा का असल नाम नामदेव दास त्यागी है। नामदेव दास त्यागी को तेज दिमाग की वजह से दिग्विजय सिंह ने कम्प्यूटर बाबा का नाम दिया। कम्प्यूटर से नामदेव दास त्यागी का इतना ही नाता है। बाकी उनके लिए कम्प्यूटर भी स्टाफ चलाता है। कम्प्यूटर बाबा का नाम 2018 में पहली बार सुर्खियों में आया। उन्हें 2018 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले शिवराज सरकार ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया था।  बाबा का ताल्लुक राजनीति से रहा है। इसलिए, उन्होंने लोकसभा चुनाव में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का विरोध किया था और कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समर्थन में मिर्ची यज्ञ किया था। दिग्विजय सिंह ने बाबा का आश्रम तोड़े जाने को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।

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