INSPIRATION : आसनसोल की ‘मुस्लिम दंपति’ ने कैंसर से पीड़ित अपने दोस्त का हिन्दू रीतिरिवाजों से किया अंतिम संस्कार; अब करेंगे ‘श्राद्ध’  

–    मानवता की मिसाल पेश की

–    सुरेंद्र अग्रवाल का शुक्रवार को सीतारामपुर में किया गया अंतिम संस्कार

 –    सैंकड़ों हिन्दू-मुस्लिम बने शव यात्रा का हिस्सा

आसनसोल : समाचार ऑनलाइन –  आसनसोल के सीतारामपुर में मानवता का एक अद्वितीय उदाहरण देखने को मिला है. यहां पर एक मुस्लिम दंपति ने अपने एक हिन्दू परिचित से किए गए वादे को निभाते हुए, उसका अंतिम संस्कार पूरे हिंदू रीति-रिवाजों से किया है. जात-पात से ऊपर उठ कर मुस्लिम दंपति द्वारा किए गए इस सराहनीय कार्य ने एक बड़ी मिसाल पेश कर दी है. इस मामले के सामने आने के बाद से हर जगह इस दंपति की खूब तारीफ की जा रही है.

कैंसर पीड़ित थे सुरेन्द्र

यह मामला सीतारामपुर का है. कैंसर पीड़ित सुरेंद्र भगत अग्रवाल ने अपने करीबी मुस्लिम दंपति सईद खान और उनकी पत्नी रेशमा के सामने इच्छा जाहिर की थी कि, उनका अंतिम संस्कार हिन्दू रीतिरिवाजों से ही किया जाए. सुरेंद्र अग्रवाल को मुंह का कैंसर था, जिससे लड़ते हुए उनकी मृत्यु हो गई. इसके बाद सीतारामपुर में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया है. अब यह मुस्लिम दंपति सुरेंद्र की  इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए, उनका श्राद्ध भी करेंगे.

मुंबई में हुई थी दोस्ती

सीतारामपुर की रेशमा ने 30 साल पहले कोलकाता (पार्क सर्कस) के सईद से शादी की थी. इसके बाद वे मुंबई चले गए, जहाँ सईद का एक छोटा फूड स्टॉल था. दोनों के कोई बच्चे नहीं है. निःसंतान दंपति की  अपने पड़ोसी सुरेंद्र के साथ अच्छी दोस्ती हो गई थी. सुरेन्द्र, रेशमा को अपनी बेटी मानते थे.

दम्पति ने अपने घर लाकर की बीमार सुरेन्द्र की सेवा

 रेशमा ने बताया कि, “कुछ समय बाद, मेरे पति जयपुर चले गए और मैं सीतारामपुर में अपने पैतृक घर लौट आई. हम सुरेंद्र जी के संपर्क में रहे. वे सीतारामपुर भी आए थे.” रेशमा के मुताबिक, “ काफी समय बाद हमे खबर मिली कि, सुरेन्द्र जी, मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं. वे राजस्थान के आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती थे. लगभग 6 महीने पहले, उन्होंने मुझे फोन कर बताया कि, “डॉक्टरों ने उन्हें कहा था कि, वह अब ज्यादा दिनों तक जिन्दा नहीं रहेंगे.” उसके बाद मेरे पति उन्हें सीतारामपुर ले आए और छह महीने तक हमने उनकी देखभाल की.”

गुरुवार शाम को ली अंतिम साँस

लगभग एक महीने पहले, सुरेंद्र जी की हालत खराब होना शुरू हो गई. उन्होंने बोलना तक बंद कर दिया था. एक राईल्स ट्यूब के इस्तेमाल से उन्हें खाना खिलाया जाता था. इस जंग से लड़ते हुए, आख़िरकार गुरुवार शाम करीब 7 बजे उनका निधन हो गया. सईद ने कहा, “हमने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करके अपना वादा निभाया. इस शव यात्रा में सैंकड़ो हिन्दू-मुस्लिम शामिल हुए थे. अब उनका श्राद्ध समारोह 10 दिनों में आयोजित किया जाएगा.

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