मध्यप्रदेश में दोनों ही पार्टियां कर्नाटक फार्मूले से तख्ता पलट की कोशिश में

भोपाल : समाचार ऑनलाइन – कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस सरकार के ताख्ता पलटने के लिए भाजपा ने सत्तारुढ़ दल के एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के इस्तीफे दिलवाकर सत्ता हासिल कर ली थी। सत्ता में काबिज होने के बाद उपचुनाव में इन विधायकों भाजपा ने चुनावी मैदान में उताकर अधिकांश को मंत्री बना दिया था। इसके बाद देश की सियासत में दल बदल और ताख्ता पलट के लिए कर्नाटक फॉर्मूले एख नजीर बन गया है। मध्य प्रदेश की सियासत में इसी फार्मूले के तहत शह और मात का खेल जारी है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल एक दूसरे को मात देने के लिए अपनी चालें चल रहे है। गुरुवार रात तेजी से बदलते घटनाक्रम में कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह डंग के इस्तीफा होना और उसके तुरंत बाद भाजपा खेमे के तीन विधायकों का मुख्यमंत्री निवास पहुंचने से सियासी पारा एकाएक सातवें आसमान पर पहुंच गया।

मध्य प्रदेश की सियासत में जारी उठापटक में दिलचस्प बात ये हैं कि भाजपा सत्ता हासिल करने के लिए जिस कर्नाटक फार्मूले पर चल रही है वहीं दूसरी सत्ता में काबिज कांग्रेस इसी कर्नाटक फॉर्मूले के सहारे अपनी सरकार बचाने की कोशिश में लगी हुई है। भाजपा जहां कांग्रेस के कुछ विधायकों का इस्तीफा दिलवाकर उनको अपने खेमे में लाने की कोशिश में लगी हुई है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी भाजपा के विधायकों को अपने पाले में लाने के लिए हर चाल चल रही है। नि:संदेह यह  दिलचस्प है कि दोनों ही पार्टी एक ही फॉर्मूले पर काम कर रही है, लेकिन इसमें पलड़ा उस पार्टी का भारी होगा जो सत्ता में काबिज है, क्योंकि उसके पास विधायकों को अपने पाले में करने के लिए कई तरीके होते है इसमें मंत्री पद सबसे बड़ा ऑफर होता है और अभी कमलनाथ सरकार की कैबिनेट में कई मंत्रियों की गुंजाइश है। अगर मध्य प्रदेश विधानसभा के सियासी समीकरण को देखे तो सदस्य संख्या के अंकगणित के हिसाब कांग्रेस, भाजपा से काफी आगे दिख रही है, लेकिन ऐसे समय जब एक  एक विधायक महत्वपूर्ण हो गया है तो सपा और बसपा के विधायकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है और वह अब तक कांग्रेस सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे है।

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