अगर आप लोन नहीं चुका पा रहे हैं, तो घबराएं नहीं; ‘ये’ हैं आपके अधिकार

नई दिल्ली: समाचार ऑनलाइन- ऐसी कई परिस्थितियाँ बनती हैं, जब कोई अपना लोन नहीं चुका पाता. इसके बाद बैंक बार-बार नोटिस भेजता है, इसके बावजूद भी अगर ग्राहक लोन नहीं चुका पाता, तो उसे डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है. ऐसे में बैंक द्वारा वसूली के लिए रिकवरी एजेंटों को ग्राहक के पास भेजा जाता है. हालांकि हर कोई जानता है कि अधिकतर रिकवरी एजेंट का व्यवहार काफी खराब होता है. ऐसे में हर ग्राहक का अधिकार है कि वह इसके खिलाफ आवाज उठा सके.

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इसलिए आज हम आपको ऐसे ही कुछ अधिकारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके इस्तेमाल से आप अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं.

1)      रिकवरी एजेंट ग्राहक के घर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही जा सकते हैं.

2)      इन्हें ग्राहकों को डराने-धमकाने या जोर-जबर्दस्ती करने का अधिकार नहीं है.

3)      अगर एजेंट बुरा बर्ताव करते हैं तो इसकी शिकायत बैंक में की जा सकती है.

4)      बैंक भी ना सुने तो बैंकिंग ओंबड्समैन की मदद ली जा सकती है.

5)      विशेषज्ञों के अनुसार कर्ज वसूली के लिए कर्ज देने वाले बैंक व  वित्तीय संस्थान को सही प्रक्रिया अपनाना जरूरी है. अगर सिक्योर्ड लोन है तो उन्हें गिरवी रखे गए एसेट को कानूनन जब्त करने का हक है. लेकिन बैंक नोटिस दिए बगैर ऐसा नहीं कर सकते.

6)      आपकी संपति जब्त करने से पहले या बकाया वसूलने से पहले बैंक को पहले आपको नोटिस देना जरूरी है. आप डिफॉल्टर हैं इसका मतलब ये नहीं की आप अपराधी हैं.

7)      अगर नोटिस पीरियड में बॉरोअर भुगतान करने लायक नहीं है, तो बैंक एसेट की बिक्री के लिए आगे बढ़ सकते हैं.

8)      संपति का सही दाम पाने का हक एसेट की बिक्री से पहले बैंक/वित्तीय संस्थान को एसेट का उचित मूल्य बताते हुए नोटिस जारी करना पड़ता है. इसमें रिजर्व प्राइस, तारीख और नीलामी के समय का भी जिक्र करने की जरूरत होती है.

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