मोहन जोशी विद्यार्थी सहायक मंडल के मानद अध्यक्ष

पुणे। महाराष्ट्र विद्यार्थी सहायक मंडल के मानद अध्यक्ष के तौर पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष पूर्व विधायक मोहन जोशी की नियुक्ति की गई। प्राचार्य डॉ. प्र. चिं. शेजवलकर के निधन के बाद संस्था का मानद अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा था। संस्था के निदेशक मंडल की ओर से एकमत से मोहन जोशी की नियुक्ति इस पद पर की गई। इस उपलक्ष्य में मोहन जोशी का संस्था की ओर से सत्कार किया गया।
संस्था के अशोक विद्यालय के परिसर में इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र विद्यार्थी सहायक मंडल के चेयरमैन सुमन घोलप, सचिव प्रसाद आबनावे, संचालक प्रथमेश आबनावे, पुष्कर आबनावे, दिलीप आबनावे, प्रकाश आबनावे, छाया आबनावे, वरिष्ठ पत्रकार अरुण खोरे के साथ संस्था के सभी स्कूल, महाविद्यालय के मुख्याध्यापक, शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित थे। कोरोना के सभी नियमों का पालन करते हुए यह कार्यक्रम हुआ।
सत्कार के बाद मोहन जोशी ने कहा, स्कूली उम्र से ही वे संस्था की गतिविधियों को देखते आए हैं। गुरूवर्य सि. धो. आबनावे, डॉ. विकास आबनावे की कार्यकुशलता से  संस्था की प्रगति हुई है। डॉ. विकास आबनावे का बेसमय चले जाना उनके लिए बेहद दुःखदायी है। संस्था की प्रगति का ग्राफ इसी तरह से उंचा रखने का दायित्व हमपर है। प्रसाद आबनावे व नए युवा संचालक मंडल के एकत्रित प्रयासों से संस्था को एक नई उंचाई पर ले जाने का उनका प्रयत्न होगा। संस्था के शताब्दी महोत्सव में संस्था का विस्तार होते हुए देखेंगे। सुमन घोलप ने कहा कि अनेक विद्वान लोगों ने संस्था का अध्यक्ष पद भूषित किया है। मोहन जोशी बचपन से ही संस्था से जुड़े हुए हैं। इसलिए संस्था की प्रगति में वे अहम भूमिका निभाएंगे। उनके सामाजिक, राजकीय अनुभव का लाभ संस्था को अवश्य होगा। डॉ. विकास आबनावे के कार्यों को आगे ले जाने में उनका मार्गदर्शन अहम साबित होंगे
प्रसाद आबनावे ने कहा, पिछले अनेक वर्षों से मोहन जोशी इस संस्था से जुड़े हुए हैं। उनकी वजह से अनेक बडे व्यक्तित्व इस संस्था से जुड़े। संस्था को सर्वव्यापी करते हुए जनमानस में ले जाने का कार्य उनकी ओर से हो रहा है। उनके नेतृत्व में आनेवाले समय में यह काम अधिक व्यापक होगा। शताब्दी वर्ष संस्था की प्रगति का शिखर छूनेवाला वर्ष साबित होगा. ऐसा विश्वास उन्हें लगता है। प्रथमेश आबनावे, पुष्कर आबनावे ने भी अपने विचार रखे। वर्षा कुलकर्णी ने प्रस्तावना तो गौरी पास्ते ने सूत्रसंचालन किया। कीर्ति पेशवे ने आभार जताया।
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