हर्षवर्धन भाजपा में शामिल; इंदापुर से प्रत्याशी भी घोषित

खुद मुख्यमंत्री ने की घोषणा; राष्ट्रवादी ने साधा पाटिल पर निशाना

पुणे। संवाददाता : जैसा कि तय माना जा रहा था कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व भूतपूर्व सहकारिता मंत्री हर्षवर्धन पाटिल बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस में न केवल उनका पार्टी में स्वागत किया बल्कि उनके अपने गढ़ इंदापुर से उन्हें प्रत्याशी भी घोषित किया। इस विधानसभा चुनाव में वे भाजपा द्वारा घोषित पहले प्रत्याशी साबित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पाटिल के भाजपा प्रवेश के लिए हम पांच सालों से नजरें गड़ाए हुए थे। वहीं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि अगर हर्षवर्धन थोड़ा पहले आते तो शायद वे सांसद होते।
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पर इंदापुर विधानसभा सीट कांग्रेस को देने का वादा पूरा न करने और चुनाव में दगाबाजी का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं भूतपूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल के भाजपा प्रवेश के संकेत दिए थे। इंदापुर की सीट से वर्तमान में राष्ट्रवादी कांग्रेस के दत्ता भरणे विधायक हैं। गत सप्ताह उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा तय करने के उद्देश्य से इंदापुर में जनसँकल्प सम्मेलन आयोजित किया था। इसमें उनके समर्थकों ने उन्हें भाजपा में शामिल होने की सलाह दी थी। इसके बाद पाटिल ‘नॉट रिचेबल’ हो गए और दो दिन बाद सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उनके दफ्तर में नजर आए थे।
आज मुंबई में हर्षवर्धन पाटिल अपने हज़ारों कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा में प्रवेश किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें इंदापुर विधानसभा की सीट से प्रत्याशी भी घोषित किया। जब हम विपक्ष में थे तब भी उनके साथ हमारे अच्छे तालुक्कात थे। इंदापुर में पानी की किल्लत समेत हर समस्या को सुलझाया जाएगा। वहीं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि, हर्षवर्धन पाटिल ने हमारे साथ आने में थोड़ी देर कर दी। अगर थोड़ा वक्त और पहले आये होते तो शायद आज वे सांसद होते।
बहरहाल राष्ट्रवादी कांग्रेस ने हर्षवर्धन पाटिल द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए उनपर निशाना साधा था। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने आज सोमेश्वरनगर में कहा कि, दोनों कांग्रेस के बीच इंदापुर की सीट छोड़ने के बारे में कुछ तय नहीं हुआ था। शरद पवार और राहुल गांधी जो भी तय करेंगे, वह हमें मंजूर रहेगा। पाटिल और इंदापुर से राष्ट्रवादी के विधायक दत्तात्रेय भरणे के बीच विधानसभा व विधानपरिषद के विकल्पों पर गौर किया जा सकता था। पाटिल भाजपा में जाने की ठान ही चुके थे, इसलिए तो दो दिन तक वे किसी के संपर्क में नहीं आए। न फोन उठाया, न मैसेज के जवाब दिये, न परोक्ष में मिले। यहां तक कि पृथ्वीराज चव्हाण की बात भी नहीं सुनी। वहीं सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि पाटिल की स्थिति ऐसे हो गई मानो झगड़ा देवर से हो गया और छोड़कर पति को जा रही हो।
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