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देवी अन्नपूर्णा फिर पधार रही हैं काशी, 100 साल पहले चोरी कर ले गए थे कनाडा

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वाराणसी. ऑनलाइन टीम  काशी को जल्द ही देवी अन्नपूर्णा की प्राचीन मूर्ति वापस मिलने जा रही है। यह मूर्ति एक सदी पहले वाराणसी के घाट से चोरी हो गई थी।
बता दें कि मानय्ताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा अन्न की अधिष्ठात्री देवी है। भगवान शंकर ने भी काशी में मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मां अन्नपूर्णा ने भगवान शंकर को आशीर्वाद दिया था कि काशी में कोई भी भक्त भूखा नही सोएगा। मां के स्वर्णमयी दर्शन और खजाने के प्रसाद को जो भी भक्त श्रद्धा से अपने घर ले जाता है और उसे रखता है उसे अन्न, धन की कभी कमी नही होती है।

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वाराणसी के देवी अन्नपूर्णा का मंदिर में आज भी विश्व भर से दर्शन के लिए लोग आते हैं। सौ साल पहले चोरी हुई थी अन्नपूर्णा की मूर्ति। काफी दिनों के बाद यह मूर्ति कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ रेजिना में मिली थी। आर्टिस्ट दिव्या मेहरा  की नजर मूर्ति पर पड़ी और उन्होंने इसका मुद्दा उठाया।  गैलरी के स्थाई कलेक्शन में पाया गया कि इस मूर्ति की वसीयत 1936 में मैकेंजी ने करवाई थी और गैलरी के संग्रह में जोड़ा गया था। इसके बाद इसका नाम रखा गया। दिव्या ने मुद्दा उठाया और कहा था कि यह अवैध रूप से कनाडा में लाई गई है। शोध में सामने आया कि मैकेंजी ने 1913 में भारत की यात्रा की थी। बताया जा रहा है कि यह मूर्ति उसी के बाद यहां से कनाडा पहुंची। अन्नपूर्णा माता अपने एक हाथ में खीर और दूसरे में चम्मच लिए हुए हैं।

पुष्टि होने के बाद मैकेंजी आर्ट गैलरी में रेजिना विश्वविद्यालय के संग्रह से अन्नपूर्णा की प्रतिमा को अंतरिम राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के उप-कुलपति थॉमस चेस, कनाडा में भारत के उच्चायुक्त अजय बिसारिया के बीच 19 नवंबर को एक समारोह में दी गई। इस समारोह में मैकेंजी आर्ट गैलरी, ग्लोबल अफेयर्स कनाडा और कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। अब इस मूर्ति को वापस भारत लाया जा रहा है।

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