बजट में कुछ ही दिन शेष…मुश्किल घंड़ी में नौकरीपेशा लोगों की उम्मीदें धारा 80सी पर टिकीं  

नई दिल्ली. ऑनलाइन टीम : कोरोनाकाल में भारी आर्थिक परेशानी झेल चुके देश को इस वर्ष के बजट पर नजर लगी हुई है, जिसके पेश होने में बस कुछ दिन ही शेष रह गए हैं।  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, 1 फरवरी को तीसरी बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह उनके लिए सबसे मुश्किल घड़ी वाला बजट होगा, जब देश महामारी के दौर से गुजर रहा है और नागरिकों को उनसे बहुत अधिक उम्मीदें हैं। सबसे अधिक उम्मीद  नौकरीपेशा लोगों की बंधी है। ध्यान रहे यह वह वर्ग है जिसके ऊपर सारा परितंत्र घूमता है। मध्यम वर्ग की उम्मीद उन रिपोर्टों पर आधारित है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि कोविड -19 महामारी के बीच अर्थव्यवस्था को पटरी पर ले जाने के लिए लिए सरकार खर्च बढ़ाएगी।

जानकारी के अनुसार, नौकरी करने वाले मिडिल क्लास को इस बार बजट में धारा 80सी के तहत टैक्स में छूट बढ़ने की उम्मीद  है। बता दें कि अभी धारा 80सी के तहत कुल 1।5 लाख रुपये तक पर टैक्स छूट पाई जा सकती है। उम्मीद की जा रही है कि इसे बढ़ाकर दो लाख रुपये किया जा सकता है।  टैक्स बचाने के लिए आयकर की धारा 80सी के तहत म्यूचुअल फंड के टैक्स फंड (ईएलएसएस), बैंक की टैक्स सेविंग्स फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम, एनपीएस, पीपीएफ, जीवन बीमा पॉलिसी, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम में लोग निवेश करते हैं। धारा 80सी के तहत बच्चों की ट्यूशन फीस पर भी टैक्स छूट मिलती है। हर साल अधिकतम दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर यह छूट मिलती है।

इस बात की भी संभावना है कि कोविड -19 के कारण पैदा हुई दिक्कतों को दूर करने के लिए किए गए खर्चों को शामिल करने के लिए धारा 80 डी के तहत कटौती का विस्तार किया जाएगा। धारा 80 डी के तहत कटौती की सीमा – (25,000 -1,00,000 रुपये) – उम्र के आधार पर भी बढ़ सकती है, क्योंकि महामारी के मद्देनजर स्वास्थ्य सेवा के खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। एक रिपोर्ट ने पहले संकेत दिया था कि सरकार कोविड -19 महामारी और वायरस के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान के दौरान अतिरिक्त लागत के लिए देश में उच्च आय वालों पर कोविड -19 सेस लगने की योजना बना रही है।

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