बार्डर पर डटे हैं किसान, कई जगहों पर भारी जाम

नई दिल्ली. ऑनलाइन टीम : तीन नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का सोमवार को 75वां दिन है।  दिल्ली से सटे सिंघु, टीकरी, गाजीपुर और शाहजहांपुर बॉर्डर पर हजारों की संख्या में जुटे किसान तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि कृषि कानून वापस नहीं होंगे। वह इन कानूनों में सुधार करने के लिए तैयार है। इस मुद्दे पर सरकार तथा किसानों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है।

इस बीच किसानों के आंदोलन के चलते नेशनल हाईवे-9 बंद होने से कई जगहों पर जाम लग गया है। वहीं, दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर जमा किसानों के अगुवा भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एलान किया है कि मांगें पूरी नहीं होते यह आंदोलन 2 अक्टूबर तक चलेगा। पिछले दिन वह कह चुके हैं कि कानून वापसी तक वह घर नहीं जाएंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने 26 जनवरी को हुए ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुए उपद्रव से अपना पल्ला झाड़ लिया था और अब अपनी छवि सुधारने के लिए इस घटनाक्रम की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है। कमेटी इसकी जांच कर रही है कि मोर्चा में शामिल संगठन के लोग कैसे निर्धारित रूट से भटक गए। जांच के दौरान फिलहाल मोर्चा ने दो संगठनों के नेताओं को दिल्ली जाने के लिए निलंबित भी किया है।

मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र में कृषि से जुड़े तीन कानून लेकर आई थी। ये तीन कानून हैं: कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन-कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020। ये तीनों कानून संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद कानून बन चुके हैं।

सरकार का दावा है कि इन कानूनों का पास होना एक ऐतिहासिक फैसला है और इससे किसानों की जिंदगी बदल जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने इन कानूनों को आजादी के बाद किसानों का एक नई आजादी देने वाला बताया है। मोदी का कहना है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का फायदा नहीं मिलने की बात गलत है।

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