गांवों में पहुंचा कोरोना… दूसरी लहर में दो गुना ज्यादा निकल रहे नए मरीज 

ऑनलाइन टीम. नई दिल्ली : कोरोना की दूसरी लहर से पूरा देश हलाकान है। इस लहर में इस बार बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग चपेट में आ रहे हैं, जबकि पिछले साल बड़े शहरों तक ही सीमित था। कस्बों और गांवों के बीच कहीं-कहीं लोगों के बीमार होने की खबरें आती थी। इस बार कई राज्यों में गांव के गांव बीमार पड़े हैं, लोगों की जानें जा रही हैं, हालांकि इनमें से ज्यादातर मौतें आंकड़ों में दर्ज नहीं हो रही हैं, क्योंकि टेस्टिंग नहीं या या लोग करा नहीं रहे। महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात समेत अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र कोरोना महामारी की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित है। गांवों की सड़कें भी सुनी हैं, हाट-बाजार पूरी तरह से बंद हैं। लोग डरे और सहमे हैं।

महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में शहर के मुकाबले गांव से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। अमरावती शहर ने मंगलवार को 249 नए कोविड -19 मामले दर्ज किए, जबकि अमरावती के ग्रामीण इलाकों में 947 नए मामले दर्ज किए गए। विदर्भ के अनेक इलाकों में कमोबेश यही हालात है। वरूड़, अचलपुर, मोरशी, अंजनगांव सुरजी और तिवसा जैसे गांव हॉटस्पॉट बने हैं।

हरियाणा : हरियाणा के भी ग्रामीण अंचलों में कोविड मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रोहतक शहर से 10 किलोमीटर दूर टिटोली गांव में पिछले दस दिनों में कोरोना से 40 लोगों की मौत हो गई है।

उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में कानपुर शहर और देहात की स्थिति बिगड़ती जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना मरीजों को उचित परामर्श दिया जा रहा है।

गुजरात : गुजरात सरकार ने 36 शहरों में रात का कर्फ्यू लगा दिया है, लेकिन गांवों में कोरोना की वजह से स्थिति भयावह होती जा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शहर से ज्यादा गांव में कोरोना मरीज निकल रहे हैं। कई मरीजों को वेंटिलेर बेड भी उपलब्ध नहीं हो रहा।

दरअसल, कोरोना जो डाटा है वो ज्यादातर शहरों का ही होता है। गांव में तो पब्लिक हेल्थ सिस्टम बद्तर है। जांच टेस्टिंग की सुविधाएं नहीं हैं। लोगों की मौत हो भी रही है तो पता नहीं चल रहा, दर्ज नहीं हो रही कहीं। दूसरा अगर आप शहरों की स्थितियां देखिए तो जो डाटा हम लोगों तक आ रहा है वो बता रहा है कि शहरों में ही मौतें आंकड़ों से कई गुना ज्यादा है। अगर ग्रामीण भारत में सही से जांच हो, आंकड़े दर्ज किए जाएं तो ये नंबर कहीं ज्यादा होगा।” ग्रामीण भारत में हालात कैसे इसका अंदाजा छोटे-छोटे कस्बों के मेडिकल स्टोर और इन जगहों पर इलाज करने वाले डॉक्टरों (डिग्री धारी और गैर-डिग्री वाले, जिन्हें बोलचाल की भाषा में झोलाछाप कहा जाता है) के यहां भीड़ से लगाया जा सकता है। यूपी जैसे राज्यों मे ब्लॉक और तहसील पर स्थित पीएचसी और सीएचसी में ओपीडी पहले से बंद है।

गांव के हालात कैसे हैं, लोग जांच क्यों नहीं करवा रहे, जांच आसानी से हो रही है, इन सबके अलग-अलग जवाब और लोगों के अपने-अपने तर्क हैं लेकिन, दो कुछ चीजें बहुत सारे लोगों में बात करने पर सामान्य नजर आती हैं। “गांव में पंचायत चुनाव और शादी बारातों ने काम खराब किया है।

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