कांग्रेस अपने दम पर लड़ना चाहती है तो शिवसेना को मिर्ची क्यों लगी?

मुंबई : एक तरफ राज्य में कोरोना का खतरा और दूसरी तरफ आगामी चुनाव की पृष्ठभूमि पर माहौल गर्माता जा रहा है। हालांकि महाविकास आघाड़ी की एकजुट सरकार है, फिर भी कांग्रेस आत्मनिर्भरता का नारा लगा रही है। ऐसे में अब सियासी आरोप-प्रत्यारोप ने रफ्तार पकड़ ली है। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के आत्मनिर्भरता के फैसले का समर्थन किया है और शिवसेना ने इसकी तीखी आलोचना की है।

अगर कांग्रेस अपने दम पर लड़ना चाहती है तो शिवसेना या शिवसेना पार्टी प्रमुख को मिर्ची क्यों लगती है?, ऐसा सवाल कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने पूछा है। यह देखना जरूरी है कि शिवसेना उनकी आलोचना पर कैसी प्रतिक्रिया देती है।

आत्मनिर्भरता का मुद्दा?

नाना पटोले ने आगामी चुनावों की बात कहने के बाद महाविकास आघाडी में खलबली मच गई है। उसके बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कांग्रेस के कान खींचे। साथ ही एनसीपी ने नाराजगी भी जताई थी। लेकिन अब कांग्रेस नेता आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर साथ आ रहे हैं। इस बात की राजनीतिक चर्चा चल रही है कि इससे महाविकास आघाडी में फूट पड़नेवाली है।

इस बीच कांग्रेस को खत्म करने या उसे लगातार तीसरे नंबर पर रखने की सोची-समझी कोशिश हो रही है। लेकिन मुझे लगता है कि कांग्रेस को अपने दम पर लड़ना चाहिए। मैं नाना पटोले के फैसले से सहमत हूं। अगर कांग्रेस अपने दम पर लड़ना चाहती है, तो शिवसेना को मिर्ची क्यों लगती है, ऐसी टिप्पणी निरुपम ने की है।

नाना पटोले दिल्ली रवाना…

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले को तुरंत दिल्ली तलब किया गया है। इसलिए खबर मिल रही है क्या धुले का दौरा आधा छोड़कर नाना पाटोले दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

शुक्रवार को कांग्रेस की अहम बैठक है। इसलिए नाना पटोले को तुरंत दिल्ली बुलाया गया है। साथ ही 5 जुलाई को मानसून अधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि अभी स्पीकर का नाम तय नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि इसी पृष्ठभूमि पर पार्टी प्रमुख ने पाटोले को दिल्ली बुलाया है।

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