मप्र में टकराव के आसार, आईएएस एसोसिएशन ने जांच एजेंसी पर उठाए सवाल

भोपाल (आईएएनएस) : समाचार ऑनलाईन – मध्य प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के बीच टकराव के आसार बनने लगे है। स्मार्ट सिटी के टेंडर मामले में केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर गए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में दर्ज की गई शिकायत के बाद आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष गौरी सिंह ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर ईओडब्ल्यू के तौर-तरीके पर सवाल उठाए हैं। ईओडब्ल्यू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, “प्राइम वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) की सहयोगी कंपनी हेवलेट पैकर्ड इंटरप्राइजेस (एचपीई) को सात स्मार्ट सिटी के ‘क्लाउड बेस्ड कॉमन इंटीग्रेटेड डाटा एंड डिजास्टर रिकवरी सेंटर’ की स्थापना का 300 करोड़ का ठेका देकर फायदा पहुंचाया गया। इस मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।”

ईओडब्ल्यू के महानिदेशक सुशोभन बनर्जी ने भी संवाददाताओं से चर्चा के दौरान शिकायत आने की बात स्वीकारते हुए कहा, “स्मार्ट सिटी के 300 करोड़ रुपये के टेंडर की शिकायत दर्ज की गई है। इसमें टेंडर कमेटी के सदस्य सहित आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल की भी जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।”

आईएएस अधिकारी के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज होने और मामला मीडिया में आने पर आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष गौरी सिंह ने सख्त ऐतराज जताया है। उन्होंने मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती को भी बुधवार को पत्र लिखा है और जांच एजेंसी पर सवाल उठाए है।

आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष गौरी सिंह ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में जांच एजेंसी को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि, जांच एजेंसियां बिना पुख्ता सबूतों के वरिष्ठ अधिकारियों की छवि को धूमिल करने में जुटी हैं। वे तथ्यों को जांचे बिना ही अफसरों के खिलाफ की गई शिकायत को मीडिया में वायरल कर रहे हैं, जो आपत्तिजनक है।

उन्होंने लिखा है कि, “जांच एजेंसियों के अहम पदों पर बैठे अफसर प्रसिद्घि पाने के लिए बिना जांच किए ही मीडिया में अपना निष्कर्ष साझा कर रहे हैं। इससे अफसरों का मनोबल गिर रहा है और जांच भी प्रभावित हो रही है। कुछ मामलों में पक्षकार शिकायत करते हैं या कोर्ट में चले जाते है। जांच एजेंसी से अपेक्षा होती है कि जांच होने तक संस्था और व्यक्ति की छवि धूमिल नहीं होने दें।”

स्र्माट सिटी मामले में ईओडब्ल्यू में दर्ज शिकायत पर पत्र में कहा गया है कि, “यह नगरीय प्रशासन विभाग से जुड़ा हुआ एक मामला है। वर्तमान प्रमुख सचिव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उचित व पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है, लेकिन ईओडब्ल्यू ने विभाग से बगैर तथ्य मांगे ही प्रेस को जानकारी दे दी।”

एसेासिएशन अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से जांच एजेंसियों के लिए एडवाइजरी जारी करने का आग्रह किया है। ज्ञात हो कि, आईएएस अग्रवाल पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान की सरकार के कार्यकाल में महत्वपूर्ण पदों पर रहे है और वर्तमान में केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर है।

ईओडब्ल्यू की कार्रवाई के बाद आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष द्वारा मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र को राज्य में आईएएस और आईपीएस के बीच टकराव के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पहले भी दोनों विभागों से जुड़े लोग अन्य मामलों में आमने-सामने हो चुके है।

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