CBSE Exam: सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द करने के निर्णय के बाद मुख्यमंत्री ठाकरे ने दिया प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद

मुंबई: ऑनलाइन टीम- मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षा रद्द करने के फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने लाइव संबोधन में मांग की थी कि 12वीं और कुछ अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बढ़ते संक्रमण की पृष्ठभूमि में केंद्रीय स्तर पर उचित निर्णय लिया जाए।

कोरोना संक्रमण अभी भी बढ़ रहा है और अभिभावक भी 10वीं और 12वीं जैसी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे थे। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने भी अपने विचार व्यक्त किए थे। मुख्यमंत्री ने पहले ही राज्य में 10वीं की परीक्षा न लेते हुए मूल्यांकन के आधार पर उत्तीर्ण करने का निर्णय लिया है। हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है।

सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं कक्षा की परीक्षा रद्द करने का फैसला मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीबीएसई बारहवीं की परीक्षा रद्द करने का फैसला छात्रों के हित में लिया गया है। छात्रों का स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोपरि है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।

शिक्षा नीति एक हो – मुख्यमंत्री

दो दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री ने राज्य को संबोधित करते हुए एक शिक्षा नीति की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि शिक्षा भी एक महत्वपूर्ण घटक है। हमने10वीं परीक्षा के संदर्भ में निर्णय लिया है। इस साल हम 10वीं कक्षा के छात्रों को 10वीं की परीक्षा दिए बिना ही पास करने जा रहे हैं। 10वीं का फैसला हुआ तो 12वीं को लेकर भी फैसला लेंगे। 12वीं को लेकर इस बात की समीक्षा की जा रही है कि इस बारे में किस अद्धति को तय करके जल्द से जल्द निर्णय ली जाए। मुझे लगता है 12वीं की परीक्षा पर आगे की पढाई निर्भर करती है। चाहे नीट परीक्षा हो, इंजीनियरिंग हो या फिर दूसरे राज्य में पढ़ने के लिए जाना हो। इसलिए केंद्र सरकार को इसके लिए कोई नीति तय करनी चाहिए। वह सौ साल पहले था, और अब हम इसका सामना कर रहे हैं।

परीक्षाओं का महत्व जो अगले जीवन को प्रभावित करता है। भविष्य उस पर निर्भर करता है। मैंने पिछले साल प्रधानमंत्री से एक अनुरोध किया था और वह आज आपके माध्यम से कर रहे हैं। पत्र लिखने की आवश्यकता होगी तो पत्र लिखेंगे बोलने की आवश्यकता होगी तो बोलेंगे कि कुछ समय के लिए जो भी निर्णय हो पूरे देश के लिए एक नीति होनी चाहिए। 12वीं कक्षा के लिए क्या किया जाना चाहिए। अगर देश में इसका असर होने वाला है, तो देश के लिए शिक्षा नीति एक होनी चाहिए। यह फैसला केंद्र को लेना चाहिए। केंद्र को हमारा मार्गदर्शन करना चाहिए। हमने 10वीं का फैसला किया है। 12वीं की परीक्षा पर भी फैसला करने जा रहे हैं, लेकिन यह फैसला पूरे देश में एक समान होना चाहिए। अन्यथा, यदि किसी राज्य में स्थिति नियंत्रण में है, तो परीक्षा आयोजित की जाएगी। यदि किसी राज्य में स्थिति नियंत्रण से बाहर है, तो परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। वास्तव में छात्रों का भविष्य क्या है? तो उसमें भी समानता होनी चाहिए। इसलिए शिक्षा नीति एक होनी चाहिए।

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