CBI ने इलाहाबाद HC के जज एस. एन. शुक्ला के खिलाफ दर्ज किया केस, मेडिकल कॉलेज के पक्ष में फैसला देने का आरोप

समाचार ऑनलाइन– मेडिकल कॉलेज के पक्ष में फैसला देने का आरोप लगने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस.एन. शुक्ला के खिलाफ अब केन्द्रीय जाँच ब्यूरो ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया है. साथ ही उनके लखनऊ स्थित उनके आवास पर भी छापामार कार्रवाई भी की गई.

शुक्ला हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस हैं। CBI ने इस मामले में  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रिटायर न्यायाधीश आय.एम. कुदुसी, प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष भगवान प्रसाद यादव, पलाश यादव के अलावा भावना पांडे और सुधीर गिरि पर भी केस दर्ज किया गया है।

CBI ने अपनी प्राथमिकी में बताया है कि,” न्यायमूर्ति श्री नारायण शुक्ला ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर, एक आपराधिक षड्यंत्र किया है. साथ ही बी. पी. यादव व पलाश यादव ने वित्तीय लाभ का फायदा उठाया है.” यह ट्रस्ट लखनऊ मेडिकल कॉलेज चलाता है. शुक्ला पर  उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों के प्रवेश की समय-सीमा बढ़ाने का आरोप है.

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि जस्टिस शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एजेंसी ने तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई को पत्र लिखा था। उनकी अनुमति के बाद जस्टिस शुक्ला पर केस दर्ज किया गया। सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सीबीआई ने वर्ष 2017 में सितंबर में भी छापे मारे थे। तब रिटायर्ड जज आईएस कुद्दुसी के ठिकानों के अलावा लखनऊ स्थित प्रसाद इंस्टीट्यूट आफ  मेडिकल साइंसेज के मालिकों बीपी यादव व पलाश यादव व अन्य के आवास पर कार्रवाई की गई थी।

जस्टिस शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को किया था नजरअंदाज

सुप्रीम कोर्ट ने प्रसाद इंस्टीट्यूट पर नए प्रवेश लेने पर रोक लगाई थी, लेकिन जस्टिस शुक्ला ने शीर्ष अदालत के फैसले को नजरअंदाज कर इंस्टीट्यूट के पक्ष में फैसला दिया था। इस मामले में पूर्व जस्टिस आईएम कुद्दूसी का भी नाम आया था। जांच के बाद सीबीआई ने कुद्दुसी समेत अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

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