किसान का साथ देने ‘बार्डर’ पर पहुंचे बौद्ध भिक्षु, निकाले जा रहे कई मायने  

ऊधमसिंह नगर. ऑनलाइन टीम : कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी पर सहमति न बनने पर शुक्रवार को 37वें दिन भी गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने धरना जारी है। इस दौरान बॉर्डर पर किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए बौद्ध भिक्षु भी धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों के साथ आंदोलन में शामिल हो गए। यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके कई मायने निकाले जा सकते हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि संबंधी तीन महत्वपूर्ण कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों के दिल्ली कूच ने राजधानी के आसपास विकट स्थिति पैदा कर दी है। इस मामले में सरकार के रवैये पर शुरू से सवाल खड़े किए जाते रहे हैं। पहले दिन से ही यह बात साफ थी कि किसानों में इन कानूनों को लेकर जबर्दस्त आशंका और विरोध है। जरूरी है कि सरकार हर संभव स्तर पर किसान नेताओं से बातचीत शुरू करे, कम से कम अपने इरादे को लेकर उनका भरोसा हासिल करे और कृषि विशेषज्ञों के जरिये तीनों कानूनों के जमीनी असर का अध्ययन कराए। इस अध्ययन की अनुशंसाएं अगर किसानों को अपनी भलाई में जाती दिखें तो संसद के बजट सत्र में इसकी रिपोर्ट पेश करके आगे का रास्ता निकाला जा सकता है।

आज तक के सबसे अपडेट में देखा जाए तो खबर यह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार,  किसानों ने चार प्रस्ताव रखे थे, जिसमें दो पर सहमति बन गई है। पर्यावरण संबंधी अध्यादेश पर रजामंदी हो गई है। एमएसपी पर कानून को लेकर चर्चा जारी है। हम एमएसपी पर लिखित आश्वसन देने के लिए तैयार हैं। एमएसपी जारी रहेगी। बिजली बिल को लेकर भी सहमति बन गई है। पराली के मुद्दे पर भी रजामंदी हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुद्दों पर किसान-सरकार के बीच 50 फीसदी सहमति बन गई है। किसानों के लिए सम्मान और संवेदना है। आशा है कि किसान और सरकार में सहमति बनेगी।

समिति बनाने के लिए सरकार पहले दिन से तैयार है। दूसरी तरफ, किसान नेता कह रहे हैं कि हमें संशोधन पर बात नहीं करनी है। हम संशोधन नहीं, कानून रद्द करवा कर वापस जाएंगे। वहीं, तीनों कानूनों की वापसी पर सरकार ने अपना पुराना स्टैंड दोहराया कि कानून की वापसी नहीं होगी. बाकी तीन मसलों पर बात हो रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार ने लिखित गारंटी देने का प्रस्ताव दोहराया है। अब देखना है कि आंदोलन की धार कितना वार कर पाती है। किसान अड़े है, तो सरकार भी अपनी जगह खड़ी है।

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