भाजपा-शिवसेना ही डाल रही है आरपीआई में फूट 

पुणे : समाचार ऑनलाइन – महायुति में आरपीआई (आठवले गुट) को शामिल कर पिछड़े वर्गीयों के वोटों से फिर सत्ता पाने में जुटी भाजपा- शिवसेना के स्थानीय नेताओं द्वारा आरपीआई की पिंपरी चिंचवड़ इकाई में फूट डालने की कोशिश में नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में महायुति के प्रचार में नए शहराध्यक्ष को दूर रखकर दूसरे स्थानीय वरिष्ठ नेताओं को बैठकों व सम्मेलनों का न्यौता दिया जा रहा है। उन्हीं के साथ प्रचार की रणनीति तय की जा रही है, नए शहराध्यक्ष को लगातार दूर किया जा रहा है।
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आरपीआई के नए शहराध्यक्ष सुरेश निकालजे ने पार्टी के पारंपरिक वोटरों वाले पिंपरी विधानसभा की सीट न मिलने से नाराज होकर केवल चिंचवड़ और भोसरी विधानसभा क्षेत्र में ही महायुति के प्रचार में शामिल होने की भूमिका अपनाई। पिंपरी की सीट से आरपीआई की वरिष्ठ नेता चंद्रकांता सोनकांबले प्रबल इच्छुक थी। मगर यह सीट शिवसेना को दी गई जहां से मौजूदा विधायक गौतम चाबुकस्वार को प्रत्याशी घोषित किया गया है। हालांकि बाद में पार्टी सुप्रीमो रामदास आठवले के आदेश के बाद निकालजे के तेवर बदल गए। बीते दिन उन्होंने पार्टी के पदाधिकारी और प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक की जिसमें शहर में विधानसभा की तीनों सीटों पर महायुति के प्रत्याशियों के प्रचार में जुटने का फैसला किया गया।
इस दौरान कल ही शिवसेना के जिला प्रमुख गजानन चिंचवड़े और दूसरे स्थानीय नेताओं ने आरपीआई के अन्य नेताओं की बैठक बुलाई। इसमें वरिष्ठ नेता चंद्रकांता सोनकांबले समेत अन्य नेता शामिल थे। इसमें आरपीआई के नेताओं ने चाबुकस्वार को भारी वोटों से जिताने की घोषणा की। इस बैठक से नए शहराध्यक्ष सुरेश निकालजे को दूर रखा गया। इसके बाद आज महायुति के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन से भी उन्हें दूर रखा गया। इसमें भी सोनकांबले और दूसरे नेताओं को न्यौता दिया गया था। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए निकालजे ने आनन फानन में पार्टी सुप्रीमो रामदास आठवले को खत भेजा और इन गतिविधियों से अवगत कराते हुए पिंपरी चिंचवड़ में महायुति के प्रचार से अलिप्त रहने की भूमिका अपनाई।

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