बिहार की लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने ठुकराया बॉलीवुड के गानों का ऑफर 

पटना. ऑनलाइन टीम : सिंगिंग टैलेंट वजह से बिहार के मैथिली ठाकुर का नाम अब कई अपरिचित नहीं। लोग उनके गायन शैली के दीवाने हैं। प्रशंसकों की दीवानगी तब और और हद पार कर गई, जब मैथिली ठाकुर ने तय किया है कि वो बॉलीवुड में एंट्री नहीं करेंगी। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में गाने से इनकार कर दिया है।

मैथिली ठाकुर के इस निर्णय का जबर्दस्त स्वागत हो रहा है। प्रशंसकों की इस तारीफ के बाद मैथिली ने यह कहा कि भले ही वह फिल्मी दुनिया में नहीं एंट्री मारेंगी, लेकिन  लोक गायिका के तौर पारंपरिक गायन जारी रखेंगी। कई यूजर्स उनके इस कदम की सराहना कर रहे हैं। राहुल कुमार नाम के ट्विटर यूजर ने अपने ट्वीट में लिखा,  कई ऑफर के बावजूद वो कभी भी इसके लिए प्रेरित नहीं हुईं। हमें उन पर गर्व है।’

बता दें कि मैथिली का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी जिले में स्थित बेनीपट्टी नामक एक छोटे से शहर में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर, जो खुद अपने क्षेत्र के लोकप्रिय संगीतकार थे, जबकि माता भारती ठाकुर  गृहिणी। उनके दो छोटे भाई हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता से संगीत सीखा। अपनी बेटी की क्षमता को महसूस करते हुए और अधिक अवसर प्राप्त करने के लिए, रमेश ठाकुर ने खुद को और अपने परिवार को द्वारकानियर नई दिल्ली में रहने लगे। मैथिली और उनके दो भाइयों की शिक्षा वहाँ के बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल में हुई थी। यहां तक कि उनकी पढ़ाई के दौरान, तीन भाई-बहनों को उनके पिता ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, हारमोनियम और तबला  में प्रशिक्षित किया।

मैथिली की संगीत यात्रा 2011 में शुरू हुई, जब वह ज़ी टीवी में प्रसारित होने वाले लिटिल चैंप्स नामक एक रियलिटी शो में दिखाई दी। हालांकि वह पहले भी कई स्थानीय कार्यक्रमों में दिखाई दी थीं, लेकिन इस रियलिटी शो के माध्यम से उन्हें पहचान मिली। वह अपने दो छोटे भाइयों रिशव और अयाची के साथ देखी जाती है। रिशव तबले पर हैं और अयाची एक गायक हैं। 2019 में मैथिली और उनके दोनों भाइयों को चुनाव आयोग द्वारा मधुबनी का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया। वो हिंदी, भोजपुरी, मैथिली और कई अलग भाषाओं में गा लेती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर उनकी फैन फॉलोइंग करोड़ों में है। लोग उनके सिंगिंग टैलेंट की काफी तारीफ करते हैं और उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं।

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