बच्चें को ‘बोतल का दूध’ पिलाने वाले सावधान !, दो साल तक के बच्चों को ‘बीमार’ कर रहा ये ‘वायरस’

मुंबई : समाचार ऑनलाइन – बोतल से दूध पिलाने वाले माता-पिता सावधान हो जाये। दरअसल देश के अलग-अलग राज्यों में बिक रही बच्चों की दूध की बोतल और सिपर में खतनाक केमिकल है। इसका दावा कई अध्ययन में किया गया है। हालांकि अब यह आगे बढ़ चूका है। दरअसल आरएसवी वायरस बच्चों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर रोज सिविल अस्पताल में इस वायरस से ग्रस्त लगभग 80 बच्चे आ रहे हैं।

6 महीने से 2 साल तक के बच्चे जल्दी हो रहे शिकार –

बोतल से दूध पीने वाले 6 माह से 2 साल तक के बच्चों में तेजी से आरएसवी (रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस) का शिकार हो रहे हैं। आरएसवी की वजह से स्वस्थ बच्चों में सर्दी-जुकाम, निमोनिया और सांस की गंभीर बीमारियां हो रहीं हैं। एक मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, सिविल अस्पताल में इन दिनों में 65 प्रतिशत केस इसी के पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, इसमें बच्चों का खाना-पीना कम हो जाता है। तो वहीं जिन बच्चों को बोतल से दूध पिलाया जाता है, उनमें भी ये फैलने का ज्यादा चांस रहा है, 45 से 50 प्रतिशत केस इसी तरह के हैं।

आरएसवी का नहीं है कोई विशेष उपचार –

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरएसवी का कोई विशेष उपचार नहीं है। इससे बचने के लिए बच्चे को तरल पदार्थ देना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर बुखार और सिरदर्द के लिए पेन किलर (एस्पिरिन नहीं) भी दे सकते हैं, लेकिन पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। हमेशा अपने हाथ धोना और खाने-पीने के बर्तन साझा न करना आरएसवी संक्रमण से बचने के आसान तरीके हैं।

वायरस के संक्रमण के लक्षण –

सांस लेने वाले मार्ग के निचले हिस्से में रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस का इंफेक्शन होता है। सूखी खांसी, बहती नाक, बुखार, गले में खरास, सिर दर्द, घबराहट, सांस लेने में तकलीफ इस वायरस के मुख्य लक्षण हैं। इस वायरस से बच्चे की त्वचा नीले रंग की दिखाई देने लगती है। इसके अलावा बच्चे में चिड़चिड़ाहट, गले में जलन और बंद नाक की भी शिकायत देने को मिलती है। इसका पता एक्स-रे से चलता है। बच्चे को एंटीबॉयोटिक भी दे सकते हैं, लेकिन 100 से अधिक बुखार हो तभी दे सकते हैं। इसके अलावा भांप या ऑक्सीजन दी जाती है।

 

You might also like

Comments are closed.