Agri Weather Alert: महाराष्ट्र में अगले सप्ताह कम बारिश, बुवाई की जल्दबाजी न करें किसान

पुणे : ऑनलाइन टीम-  राज्य में अगले सप्ताह मानसून की बारिश में कमी आएगी और गर्मी बढ़ेगी, वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ के एस होसालीकर ने ट्वीट कर राज्य के मौसम का पूर्वानुमान लगाया है। उनके अनुसार, कई किसान पिछले सप्ताह की बारिश के बाद बुवाई के लिए जल्दबाजी कर सकते हैं, लेकिन किसानों को अगले सप्ताह बारिश के न होने संकेत मिल रहे हैं, इसलिए किसान बुवाई के लिए जल्दबाजी न करें।

 जून महीने का यह अंतिम सप्ताह है। राज्य में मानसून की घोषणा को 15 दिन बीत चुके हैं। पिछले एक सप्ताह में राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। इसलिए, किसानों को लग रहा होगा कि बुवाई का यही सही समय है। लेकिन अगर बुवाई के बाद बारिश गायब हो जाती है तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए होसालीकर ने सलाह दी कि मानसून की बारिश फिर से सक्रिय होने से पहले किसानों को बुवाई नहीं करनी चाहिए।

राज्य में एक बार फिर से तापमान बढ़ते दिख रहा है ऐसे में आईएमडी ने राज्य में आने वाले सप्ताह में कम बारिश की भविष्यवाणी की है, किसानों को बुवाई करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए व आईएमडी और कृषि विभाग की सलाह का उपयोग करना चाहिए।

– K S Hosalikar (@Hosalikar_KS) 23 जून, 2021

फिर से बुवाई की परेशानी नहीं

पिछले कुछ वर्षों से किसान दोहरी बुवाई के संकट का सामना कर रहे हैं। जून के महीने में बारिश होती है। उसके बाद किसान खूब बुवाई करते हैं। हालांकि, उसके बाद बारिश गायब हो जाती है और फसलों को नुकसान पहुंचता है। गर्मियों में खेतों के कुओं का पानी सूख जाता है। ऐसे में बारिश के गायब होने से बोए गए बीज बर्बाद हो जाते हैं और किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। बारिश के गायब होने का यह सिलसिला पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है और इस संकट को टालने के लिए किसानों को मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नजर रखने की जरूरत है।

प्रकृति का बदलता चक्र

पिछले कुछ सालों में प्रकृति का चक्र बदल गया है और कहा जाता है कि हर मौसम करीब डेढ़ महीने तक चलता है। इसलिए, पिछले कुछ वर्षों से दर्ज किया गया है कि मानसून की बारिश जुलाई के अंत में शुरू होती है। इसी तरह नवरात्रि पर्व के बावजूद भी बारिश का सिलसिला जारी है। दीपावली पर भी अक्सर बारिश की बौछारें देखने को मिलती हैं। इस बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को अपने खेती की योजना बनाने की जरूरत है।

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